पदानी बोडी का मन कु मैल ..मेरा मन की बात
बौत साल पुराणी बात छ हम छोटा छोटा थान | क्या छ होनु या समझ थें पर क्या कन्न यी नी जाणदा थान | पदानी बोडी तें भोला दीदा का खुगला पर बेसुध पड़यूँ देखि तें मन माँ एक सकून सी मिली अर दगड़ा माँ याद ओंण लगिगे बोडी की व चिल्स्य-पिलसी, उ नाज उ नखरा | इंसान जब असमर्थ व्हे जांदू त कख हर्ची जांदा मन का उ बैम,उ विचार सब इंसान बराबर व्हे जांदा क्वी छोटु नि क्वी बाडू नी क्वी ऊँच नी क्वी नीच नी |
भोला दीदा हमारा गौं कु मोची छ | पुराणी रीति सी हमारू गौं भरु- पुरु गौं थों |हमारा गौं माँ मोची, ल्वार, सुनार , औजी, बामण, भंडारी, कठैत इथ्गा लोग रंदा छन| फसल पात भी खूब ही होंदी छाई पैंसी टक्की त ते जमाना माँ होंदी ही नी थैं |कभी का दिनु माँ सारा गौं का जुत्ता मोची बनादा थान, कुल्ली -दाथाड़ी ल्वार बनादा थान, लत्ता -कपड़ी औजी थान |अर बदला माँ सभी परिवारू सी फसल व्हाण पर डाड़्वार ली जांदा थान | बस सारू गौं एक- हक्का का सारा ही रांदु थों | ओंसी संग्रंदी हो, तीज हो त्यौहार हो,ब्यो कारज हो सब सामिल सब अपुरु सहयोग देनदा थान आज सभी धणी बदिलिग्या बस कुछ भी उनु नी राइ |
पदानी बोडी बड़ी भेद भाऊ करीदी छाई कई हाकी जाती वालन धारा माँ पाणी भोरी त वीन दस बार धारू ध्वान थों ,गिल्ला कपड़ों मा कै पर हाथ नी लगान्दी थें | जै झांकरी बोडिं कभी चा कु गिलाश भोला दीदा का हाथ पर नी पकडे थों आज वेकि ही खुगली मा बेसुध पड़ीं थें | अर भोला दीदा वींका का मुख पर पाणी का छिंटा मान पर थोन झुक्युं की कब बोडी होश मा आली | बोडी होश मा आई |भोला भाई ण बोडी घुघु मा धरी अर घर पोंचाई दिनी |बोडी मन कु सारू मैल धूलि गयी | उ दिन थोन अर बस कभी भी झांकरी बोडिं फिर कभी भेद भाऊ नी करी |मांखी मरी तें स्वर्ग व्हे जांदू आज न ही झांकरी बोडी छ न भोला दीदा छ| पर उनकी याद सदनी मेरा मन मा राली |