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  • Prabandhak: देली माँ मेरी कु धोली गे फुल्कंडि या गीतू की ,  कैन दिलयाये मैकू याद अरे उलराया रितु की,  कुछ ही दिन चन रयान , अब जुग जाण माँ ,  न फिर कैन बग्ड्वाल लाणो , न औणी याद कई भरना आर जीतू की   Dinesh Bijalwan
    March 14, 2013, 02:11:56 PM
  • Pankaj J: फेसबुक पाण्डेय काले कौव्वा, खाले, ले कौव्वा पूड़ी, मैं कें दे -ठुल-ठुलि या भल-भलि ले कौव्वा ढाल, दे मैं कें सुणो थाल, ले कौव्वा तलवार, बणे दे मैं कें होश्यार। – काले कौव्वा काले, मेरी घुघुती खाले।- आप सभी को मकर सक्रांति की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं
    January 13, 2013, 04:40:51 PM
  • Rajesh Joshi: .मंगलमय हो आपतैं, बल नयुं साल-2013, बद्रीविशाल जी की कृपा सी, जुगराजि रयन, हमारू कुमाऊँ- गढ़वाळ, दनकदु रयन आप, प्रगति पथ फर, चढ़दु रयन ऊकाळ,             (रचना: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु")+
    December 31, 2012, 12:06:21 PM
  • Prabandhak: "शेरदा अनपढ़" जी.. कविवर बौड़िक ऐन..  आखिर! आप कविवर, यीं धरती सी दूर, चलिग्यन, कुजाणि कख, कालजयी, कुमाऊनी कविताओं कू, सृजन करिक, अनंत की ओर.....  हमारा प्रिय स्वर्गवासी, जनकवि "गिर्दा" जी तैं, धरती का हाल बतैन, ऊँका चाण वाळौं की, विरह मा व्यथित, मन की बात बतैन, ह्वै सकु त फिर, "गिर्दा" जी का दगड़ा, नयुं शरीर धारण करिक, उत्तराखंड की धरती मा, कविवर बौड़िक ऐन..
    May 21, 2012, 02:25:47 PM
  • Prabandhak: प्रख्यात कुमाऊंनी कवि शेर सिंह बिष्ट यानि ’शेरदा अनपढ़’ का रविवार सायं निधन हो गया।  कुछ समय से बीमार चल रहे ७९ वर्षीय शेरदा ने अस्पताल में उपचार के दौरान अन्तिम सांस ली।  तीन अक्टूबर १९३३ को अल्मोड़ा के माल गांव में जन्मे शेरदा वर्तमान में हल्द्वानी की श्याम विहार कॉलोनी मुखानी में रह रहे थे।
    May 21, 2012, 09:46:48 AM
  • Prabandhak: मान्यवर   बुरांस परिवार की तरफ भटेय सादर सैमन्या अर  सेवा  श्रीमान जी  लोकभाषा (गढ़वली - कुमौनी अर जौनसारी )  की समस्या और समाधान थेय " कौथिग २०१२ " मा  मुंबई का प्रवासी उत्तराखंडी  समाज का बीच एक परिचर्चा का रूप मा ल्याणा की कोशिश मुंबई का बुरांस संगठन कु एक प्रयास ,लोकभाषा का क्षेत्र मा पिछला २५ बरसौं भटेय आंदोलनरत धाद संगठन का  " धाद लोकभाषा एकांश "  की विमर्श श्रंखला  "आखिर कनकै  बचऽलि भाषा " मा हम आप्थेय लोक भाषा प्रेमी और बुद्धिजीवी  का रूप मा आपक वैचारिऽक उपस्थिति का वास्ता  सादर न्यूतणा छौं ,   कार्यक्रम मा आपकू आणु और आप्की भागीदारी थेय बुरांस परिवार अप्डू  सौभाग्य सम्झलू  कार्यक्रम मा आप्की जग्वाल रैली  शुभकामनाओं  दगड आपकू अप्डू गीतेश सिंह नेगी जग्वाल मा :  बुरांस परिवार मुंबई ,धाद लोकभाषा एकांश व कौथिग परिवार मुंबई संपर्क सूत्र : ०८७९१५६११०८,०९६१९००४७९७
    April 23, 2012, 12:44:33 PM
  • Editor Garhwali: Mujib Naithani सेमन्या उत्तराखण्ड..बल ..अगर आपको हाई प्रोफाईल ड्रामा सिखना हो तो कांग्रेस से सीखो ..बल ..केंद्र में आते ही सौ दिन का एजेंडा कई दिन मीडिया में चला ..बल अब तो कई सौ दिन बीत गए पर एजेंडा बल पता नि कख हर्ची गे / वनी एक मंत्री दीदा आते ही हवाई फायर हो गए ये तैयार करो ...वो..बड़ी बड़ी बातें ..बल ..लम्बी लम्बी गप्प ..मुझे स्कूल की दैनिक रिपोर्ट चाहिए ..बल इन लगणु च की मंत्री दीदा पहाड़ी नि छन /बल ..किले...
    April 11, 2012, 02:30:16 PM
  • VINOD GARIYA: "कौ लाटा आण काथा, सुण काला तु , अनाड़िल घट लगाई, दौड़ डुना तु"
    December 26, 2011, 04:29:54 PM
  • Admin: नय्या पीढ़ी आपनी पछाण भुल्या धारा नौला आपना पहाड़ भुल्या  गौं में कि भुल्यु चेलो इसके बतुछ बस द्वी आँखा चार हाड भुल्या  भोट मांगन घर घर डेली उनान सब कॉल करार इन गंज्याढ़ भुल्या  "गुमनाम पिथौरागढ़ी "
    December 25, 2011, 09:49:06 AM
  • Rajesh Joshi: कुमाऊँनी रिस्त... माँ - इजा पापा - बौज्यू भाई - भै बहन - बैणि दादा, नाना - बूबू दादी, नानी - आमा चाचा - कग चाची - काखि ताई - ज्यार्ज पड़ोसी - आमा, बूबू, बोजि या पै नानतिन.. बाकि मैंस तो सब प्लेन्स जै रयीं डबल कमूणे लिजी !
    October 05, 2011, 10:09:20 PM

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Author Topic: गढवाळऐ बड़ा आदिम - भीष्म कुकरेती (Bhishma Kukreti)  (Read 2780 times)  Share 

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारी जुग बिटेन अब तलक ): फडक -15
गढ़वाल की विभूतियाँ (मलारी युग से वर्तमान तक ) : भाग 15
Great Garhwali Personalities (Malari Era till Date): Part 15

 
( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं तैं याद कराण जौंक कारण आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च /गर्व च )
पर्वताकर का पौरव -राजवंश ( 647- 735 AD)
अल्मोड़ा क तलेश्वरी मा एक पुंगड़औ भीड़ा से प्राप्त ताम्रपत्र से मालूम होंद बल कत्युरी राजाओं से पैली उत्तराखंड पर पौरव राजाओं कु राज छौ . पुरवा या पौरव राजवंश सोम दिवाकर वंशी माणदन अर ताम्रपत्र मा सोम वंशी . पौरव वंश तैं पुरवा का वंशज बताये जांद
विष्णुवर्मन: इन लगद विष्णुवर्मन हर्ष को समौ पर ब्रह्मपुरी को शाषक थौ
वृषभ वर्मन प्रथम : हर्ष को समौ पर ब्रह्मपुरी को शाषक थौ
परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन: वृषभ वर्मन को नौनु परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन ह्व़े. परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन गो ब्राह्मण हितैषी थौ . हूण अर कुछ-कुछ बुद्ध धर्म को कारण वर्ण शंकर व्यवस्था कुमाऊं अर गढवाल मा बि सौरी/फ़ैली गे छे . अर परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन वर्ण शंकर व्यवस्था तैं पुरी तरां खतम कार . बैरी विणाश मा परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन ज्युंरा (यमराज) क रूप मा माणे जान्द .
परमभट्टारक महाराजाधिराज द्युति वर्मन या द्विज वर्मन : परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन कु नौनु द्विज वर्मन थौ
विष्णुवर्मन दुसरू : सैत च परमभट्टारक महाराजाधिराज द्युति वर्मन/द्विज वर्मन कु नौनु विष्णुवर्मन दुसरू, पौरव राज को आखरी रज्जा छौ . वो मयल़ू (विनय), भड़ (बीर,शौर्यशाली ) धीरू, गम्भीर छौ
पौरव -राजवंश का मंत्री देवद्रोणयधिकृत एकास्वामिन: तालेश्वर ताम्रपत्र कु हिसाब से एकास्वामिन पौरव बंश कु मंत्री छौ अर वैकी पदवी देवद्रोणयधिकृत छे . एकास्वमिन कु समौ क पता नी च.
पौरव -राजवंश का मंत्री देवद्रोणयधिकृत मारीपतशर्मन : तालेश्वर ताम्रपत्र कु हिसाब से मारीपतशर्मनपौरव बंश कु मंत्री छौ अर वैकी पदवी देवद्रोणयधिकृत छे
आमात्य भद्र्विष्णु: आमात्य भद्र्विष्णु पौरव बंश को एक ख़ास मंत्री छौ
(History of Early Garhwal, History of Early Kumaun )

अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (16)
क्रमश : ...भाग - 16
Continued .... part 16
Reference : Dr Shiv Prasad Dabral : Uttarakhand ka Itihas Part 3, (History of Uttarakhand)
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti ) <bckukreti@gmail.com>

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारी जुग बिटेन अब तलक ) : फडक -16
गढ़वाल की विभूतियाँ (मलारी युग से वर्तमान तक ) : भाग 16
Great Garhwali Personalities (Malari Era till Date): Part 16

 
(ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं तैं याद कराण जौंक कारण आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च /गर्व च )
Garhwali and Kumauni Languages Form in Paurav Era ( 647- 735 AD)
With the aid of Copper Plates found in Taleshwar, Almoda, Dr Shiv Prasad Dabral concludes tha there was certainly modified form of Garhwali and Kumauni languages than the older one Khas-and Kanaiti mixed Kumauni and Garhwali. Dr Dabral states that the language was Deshbhasha of common people which later on developed into refined Garhwali and Kumauni languages ( Uttarakhand ka Rajnaitik v Sanskritik Itihas -3, pp 420-421)
As is the tendency in present time, the rulars (Paurav Vanshi) transformed the original name into Sanskritized names as today, most of the goverment hordings are either in Hindi or in English and the names of villages are changed as per Hindi /English grammar or phonology than Kumauni or Garhwali.
Dr Dabral states that
" पौरव वंश के समय ग्रामों व खेतों के नाम समकालीन देशभाषा में थे. किन्तु पौरव शासनों (के ताम्रपत्रों ) में देश भाषा के नामों को संस्कृत रूप देकर ताम्रपत्रों में अंकित किया गया , यथा:
डा डबराल को बुलण छ बल पर्वताकर पौरव राज वन्श्युं क समौ पर कुमौं अर गढवाळ मा देशभाषा मा बचळयान्द छया पण राजाऊं अर बड़ा लोखुंन गढवाळी कुमाउनी का गाँव तैं ताम्रपत्रों मा संस्कृत रूप देकी अंकित कार अर या प्रवृति आज हिंदी या अंगरेजी सरकारी अधिसूचना मा बि दिखेंद जब गौं क नाम बदली जान्दन .
डा शिव प्रसाद डबराल न य़ी दिरिषटान्त दिने :
ताम्रपत्रों मा गाऊं नाम ( 647- 735 AD) असली देशी भाषा मा गाऊं/पुंगड़/खेत का नाम
उदुम्बर बास ------------------------ ----------------------------------- गोविलबास
कपिलगर्ता --------------------------------------------------------------कपिल्यागाड
कोल्लपुरी -------------------------------------------------------------- कोलिगांव
खंडाकप्ल्लिका ---------------------------------------------------------- खंड गाऊं
खट्टल्लिका ------------------------------------------------------------- खाटळी
खोहिलका -------------------------------------------------------------- खोळी
गोहट्टबाटक ------------------------------------------------------------- गोरबाट
चम्पक ------------------------------------------------------------------चम्पा
चंदुलाकपाली ------------------------------------------------------------ चंडा पाली
छिद्र्गर्ता ---------------------------------------------------------------- उड़्यार
जयभट्टपल्लिका --------------------------------------------------------- जैगाँ भट्टगाँ
जम्बुसालिका ------------------------------------------------------------ जामुण सारी
डिणडिका --------------------------------------------------------------- डिंडा
डुभाया ------------------------------------------------------------------ डोभ
तोली ------------------------------------------------------------------- तोळी
तापल्ली ---------------------------------------------------------------- थापळी
दीपपुर ------------------------------------------------------------------ द्यूल़ा
दूणणा ------------------------------------------------------------------ दूणी
देवखल ----------------------------------------------------------------- दिख्य्त
द्रोणी ------------------------------------------------------------------- दूण , दून
निम्बसारी -------------------------------------------------------------- निमसारी
पल्ली ------------------------------------------------------------------ पाल़ी
बुरासिका --------------------------------------------------------------- बुरांसी
बृद्धतर पाल्लिका -------------------------------------------------------- बड़ी पाली
बंजाली ----------------------------------------------------------------- बंजागौं
भट्टपल्लिका ------------------------------------------------------------ भट्ट गाँ
भूतप्ल्लिका ------------------------------------------------------------ भूत गाँ
मालवक क्षेत्र ----------------------------------------------------------- मालूंखेत
रजक्स्थल ------------------------------------------------------------- धोबीघाट
लवणोंदक ------------------------------------------------------------- लुणियासोत
सेम्मक क्षेत्र ----------------------------------------------------------- सीम
सेम्महिका ------------------------------------------------------------ सिमलगा
गढवा ळी अर कुमाउनी भाषा का जणगरुं /विद्वानुं तैं भाषाओं क पुराण/ इतिहास लिखद दें इन बातों ध्यान रखण जरोरी छ .
(History of Early Garhwal, History of Early Kumaun )

अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (17)
क्रमश : ...भाग - 17
Continued .... part 17
Reference : Dr Shiv Prasad Dabral : Uttarakhand ka Itihas Part 3, (History of Uttarakhand)
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti ) <bckukreti@gmail.com>

« Last Edit: December 13, 2011, 09:47:40 PM by Editor Garhwali »

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारी जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -17
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 17
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -17

 
यशोवर्मन कु राज मा उत्तराखंड (725-752)
यशोवर्मन: तुक्का अर कुछ काव्य साहित्य क हिसाब से इन बुले जान्द बल यशोवर्मन (कान्यकुब कु राजा ) न उत्तराखुंट पर राज करी थौ. ह्व़े क्या छे बल तिब्बती राजा न नेपाल जितणो परांत गढवाल-कुमाऊं पर आक्रमण करी दे अर काब्य्कुब्ज कु राजा यशोवर्मन न तिब्बती राजा तैं लड़ाई मा हरे दे छौ अर कैंतुरा राजा /प्रशाशक मसंतन या वसन्तं तैं राज करणों मुख्त्यार बणे दे .
History of Garhwal, History of Kumaun )

अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (18)
क्रमश : ...भाग - 18
Continued .... part 18
Reference : Dr Shiv Prasad Dabral : Uttarakhand ka Itihas Part 3, (History of Uttarakhand)
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti ) <bckukreti@gmail.com>
« Last Edit: December 13, 2011, 10:02:19 PM by Editor Garhwali »

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक )फड़क -18
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 18
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -18

 
कार्तिकेय का कत्युरी -राजवंश (732-1000 AD)
उन त इतिहासु जणगरों इकमत नी च बल कार्तिकेय तैं जोशीमठ का नजीक माने जाओ या कुमाऊं का कत्युर उपत्यका तैं. पण एक बात जरुर छ एक दें सरा उत्तराखुंट पर
कैंत्युराऊं राज छौ
कैंत्युराओं क तीन परिवार
कैंत्युराओं अभिलेख ( जोशीमठ, बागेश्वर, , पांडुकेश्वर , बालेश्वर, कालीमठ अर बडापुर से पता चलद बल एकी राजवंश का तीन परिवारों न न्याड ध्वार अपणी राजधानी बसै थौ अर राज करी थौ
शक- कुषाणों से सम्बन्ध : पुराण लिख्वार (इतिहास लेखक) कनिंघम को मणन च बल कनितुरा शब्द ' कटोर्मन या किटोरान ' से आई. राहुल बोल्दो बल कैंतुरौं सम्बन्ध शक- कुषाणों से थौ
खश जाती से सम्बन्ध : डा डबराल अपणी राय दीन्दन बल कन्त्युरा पैली खश रै होला. ओकले बुलद बल कार्तिकेय राजधानी से कैंत्युरा शब्द बौण.
वसंतदेव की साखी (वंशज) (732-800 AD)
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर वसंतदेव या मसंतदेव या भसंतदेव ( राज्यारम्भ ७३२ ई.) : इन माने जांद बल कन्त्युरा राज की पवाण (शुरुवात) वसंतदेव न लगै थै . वसंत देव धार्मिक वृति अर शौर्य वल़ू रजा छौ . वैन सैत च जोशीमठ को नृसिंह मंदिर की पौ धरी छे (स्थापना की )
राणी सज्यनरा : वसंतदेव की राणी सज्यनरा छे .
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर वसंतदेव को नौनु : ये नौनु को नाम अभिलेखों मा नी च बसपरम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर की पदवी लिखीं च . यू शिव भक्त थौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर खर्पर देव : खर्पर देव वसंत देव को नाती थौ .
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर अधिधज: अधिधज वित्त-विद्या-मान छौ
राणी लद्धा देवी अधिधज की राणी क नौ लद्धादेवी छौ अर वीन्का द्वी नौन्याळ छ्या
त्रिभुवन राजदेव : त्रिभुवन राजदेव कमजोर रज्जा थौ
निम्बर अर वैकी साखी (वंशज ) (800- 876)
निम्बर राजा : निम्बर रज्जा पांडूकेश्वर कु राजा थौ अर धार्मिक गम्भीर रज्जा थौ
राणी नाशुदेवी : निम्बर राजा की अग्रम्हिषी को नाम नाशु देवी छौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर इष्टगण देव : इष्ट गण देव निम्बर कु राजकुमार छौ . वैकी द्वी राणी छे . वो अपण तलवार से हाथियुं तैं काटी दींदु थौ
धरादेवी : धरादेवी इष्ट गण देव कि राणी छे
वेग देवी : वेग देवी बि इष्ट गण देव की राणी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर ललितशुरदेव : इष्टदेव कु राजकुमार कु नौ ललितशुरदेव थौ
लयादेवी राणी : लयादेवी ललितशुर देव की राणी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर भूदेव : भूदेव ललित शूर देव कु राजकुमार छौ भूदेव ब्रह्मण भक्त अर बुद्ध-श्रवण शत्रु छौ यानि कि कखी ना कखी वो बुद्ध धर्म को विरुद्ध छौ
सलोणादित्य अर वैकी साखी (वंशज) (876-1000 AD)
सलोणादित्य : सलोणादित्य की राजधानी सुभिक्षपुर छे
राणी सिन्धवली देवी : सलोणादित्य की राणी सिन्धवळी देवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर इच्छट देव : इच्छ्ट देव सलोणादित्य को राजकुमार थौ
राणी सिन्धुदेवी : इच्छ्ट देव की राणी सिन्धुदेवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर देशट देव : इच्छ्ट देव कु नौनु देशट देव बामण पूजक अर दानि थौ . वैकी प्रतिहार नरेश से भिडंत ह्व़े छौ जैमा जीत देशट देव की ही ह्व़े . मैदानी खसरों (रिकार्ड) मा इच्छ्ट देव तैं खशाधिपति माने गे
पदमल्ल देवी : देशट देव की राणी कु नौ पदमल्ल देवी छौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर पद्मट : पद्मट पराक्रमी रज्जा थौ
राणी दिशाल देवी : पद्मट की राणी दिशल देवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर पद्मट सुभिक्षराज : इन बुले जांद बल वो बैरी विणास मा कुशल रज्जा थौ. बैर्युं क्ज्यान /राणी कु हरण करण मा उस्ताद छौ अर सलोणादित्य कैंतुरा वंश को आख़री चिराग बि छौ
भट्ट भवशर्मन बामण : भट्ट भवशर्मन बामण सैत च सुभिक्ष राज का आमात्य थौ अर भट्ट रूद्र - भोगा वळी को नौनु थौ
नरसिंह देव : इन माने जांद बल सलोणादित्य कैंतुरा वंश का बाद नरसिंघ देव कैंतुरा न राज सँभाळी थौ अर राजधानी बैजनाथ ल्ही गे छौ
कैंतुरा नरेश चरित्रवान , भड़ , बीर अर जनता का प्रेमी छया तबी त अबी तलक कुमौं अर गढवाल मा कैंत्युरा नचाये जान्दन
कैंतुरा राजाऊं न गढवाल-कुमौं मा तिब्बती राज तैं आण से र्वाक अर मैदानी राजाओं पर बि रोक लगाई
अगने बाँचो शंकराचार्य को गढवाल औण .....
History of Garhwal, History of Kumaun )

अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (19)
क्रमश : ...भाग - 19
Continued .... part 19
Reference : Dr Shiv Prasad Dabral : Uttarakhand ka Itihas Part 3, (History of Uttarakhand)
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -19
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 19
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -19

 
शंकराचार्य (788-820AD) कु गढवाल औण
Arrival of Shankaracharya in Garhwal
शंकराचार्य कु जनम केरल मा कलटी गाँव मा शिव गुरु नाम्बुदिपराद अर विशिष्ठा या सती को ड़्यार ह्व़े . बुबा बाल़ापन मा गुजर गे छौ अर शंकर बाल़ापन मा इ सन्यासी ह्व़े गे छौ
शंकर न बचपन मा ही उपनिषद अर ब्रह्मसुत्रुं ज्ञान ल़े आली थौ . १२ बरस मा कशी मा वैन वेदान्त को प्रचार शुरू करी.
शंकर गढवाल कि तरफ चली जख वैकी मनशा व्यासगुफा मा वेदांत सूत्र लिखणे छे अर ऋषिकेश मा औण पर पता चौल बल पुजारियों न तिबतियों डौर न विष्णु मुरती लुकाई दिनी . शंकर न मुरती को उद्धार करी अर फिर से मन्दिर मा मुरती थर्पी .
बद्रिकाश्रम औण पर पता चली बल तिब्बती लुठेरों डौरन बद्रेश्वर की मुरती नारद कुंड मा लुकायीं च . शंकर ण वा खंडित मूर्ती को उद्धार करी अर फिर से मंदिर मा थर्पी .
शंकर न व्यासगुफा (माणा गौं मथी ) मा ब्रह्म सूत्र, भगवद्गीता, उपनिषदों पर भाष्य लिखी
शंकर न भारत का चरी कूणो मा शृगेरी, गोवर्धन, शारदा अर ज्योतिर्मठ की स्थापना बि करी
शंकर केदारनाथ मा ३२ साल कि उमर मा (८२० ई.) परलोक गेन
शंकरं बद्रिकाश्रम कि पूजा विधान का नियम बि बणेन अर अपनों पैलू च्याला तोटकाचार्य तैं यू काज सौंप.
820 AD--1222 AD तलक बदीनाथ की पूजा अर ज्योतिर्मठ की व्यवस्था आचार्य करदा था . फिर केरल का रावलुं हथ मा या गद्दी आई
820 AD--1222 AD तलक बद्रीनाथ मा तौळ लिख्यान उनीस (19 ) आचार्य ह्वेन जौन बदीनाथ की पूजा अर ज्योतिर्मठ की व्यवस्था करी
तोटकाचार्य
विजयाचार्य
कृष्णाचार्य
कुमारोआचार्य
गरुड़ध्वजाचार्य
विन्ध्याचार्य
विशालाचार्य
वकुलाचार्य
वामनाचार्य
सुन्दरअरुणाचार्य
श्री निवाशाचार्य
सुखनंदाचार्य
विद्यानन्दाचार्य
शिवाचार्य
गिरिआचार्य
विद्याधराचार्य
गुणानन्दाचार्या
नारायणाचार्य
उमापतिआचार्य
शंकराचार्या को भारत मा सांस्कृतिक एकता बणाणो बान बड़ो योगदान च
(History of Garhwal, History of Kumaun )

अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (20)
क्रमश : ...भाग - 20
Continued .... part 20
Reference : Dr Shiv Prasad Dabral : Uttarakhand ka Itihas Part 3, (History of Uttarakhand)
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -20
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 20
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -20

 
वैद्यनाथ का कत्युरी राजसाखी (राजवंश 100-1100 )
जु बि वजे रै होली 1000 AD का न्याड ध्वार , कत्युरी राजा नरसिंघ देव अपणो कोट (अपणी राजधानी ) कार्तिकेय बिटेन बैजनाथ ल्ही गे.
इतिहास्कारुं तैं कत्युरी वंश का तीन परिवारून जानकारी मिल्द
डोटी वंशावली : पिथियराजदेव , धामदेव अर ब्रह्म देव
असकोट वंशावळी : प्रीतामदेव , धाम देव, ब्रह्मदेव
पाली वंशावळी : धामदेव , ब्रह्मदेव
जागरुं मा कत्ति राजाओं जागर लगदन
प्रीतमदेव : प्रीतमदेव सैत च नर्सिंग्देव कू वंशज नी छयो अर नरसिंघ देव कू स्व़ार बहार रै होलू . जागरूं मा प्रीतम देव की दस साखुं बिरतांत बुले जान्द
अमरदेव पुंडीर :प्रीतम देव का समौ पर यू हरिद्वार का न्याड धोरा क रज्जा या सामंत छयो अर वैकी बेटी को नाम मोलादेई थौ जैन ब्यौ प्रेतं देव से ह्व़े थौ
राणी मोलादेई : राणी मोलादेई को ब्यौ बुड्या राजा प्रीतम देव से ह्व़े छौ . अमरदेव पुंडीर न अपण राजकुमारी को ब्यौ प्रीतम देव को दगड डौरन करी थौ . राणी मोलादेई बद्रीनाथ बि गे छई .
धामदेव : धामदेव प्रीतम देव को बुद्यांद दें औलाद छे वैकी ब्व़े मोलादेई छे . जग्रून मा धामदेव कि बड़ी बड़ें होंद
ब्रह्मदेव : ब्रह्मदेव धामदेव को उत्तराधिकारी थौ
जगस समवा : जगस समवा न धामदेव अर ब्रह्मदेव की मौ मदद करी छे . ब्रह्म देव न भाभर क्षेत्र समवा की मदद से जीति छे
वीरदेव: इन लगद वीरदेव गढवाळ मा कत्युरा वंश को आखरी रज्जा छौ पन कुमाऊं मा राज राई अर मनराल जात का लोक कन्त्युरा जाती का छन अर वूं कुछ समौ तक कुमौं मा राज करी. नरसिंग देव का वंशजूं राज 1100 AD तलक रै होलू
त्रिभुवन पालदेव की साखी ( वंशज ) (1100 AD- 1223 AD)
रामदत्त त्रिपाठी कि पोथी से वैद्यनाथ - कार्तिकेय मा ११०० बिटेन १२२३ ई तक यूँ राजाओं न राज करी
१- त्रिभुवन पालदेव
२-पता नीच
३- पता नी च
४-उदयपाल देव ( ११५२ ई)
५- अनंत पालदेव (११८१ ई)
६- इंद्र देव ( १२०२ ई)
६ अ - राणी दमयन्ती : दमयंती राणी न चौघाड़पाटा मा एक बग्वान (उद्द्यान) बणे छौ
७- विजयपाल देव (१२१४ ई)
८- लक्ष्मण पाल देव
९- बल्लाल देव ( १२२३ ई.)
गुलण : गुलण (११४३-११४५ ) न द्वारहात अर गोपेश्वर मा मंदिर बणे छ्या
साधुवर देव ; साधुवरदेव न द्वारहात मा बद्रीनाथ मन्दिर निर्माण अर उखमा मा लक्ष्मी जी कि मुरती (११८५) स्थापित करी छे अर गोरिल मंदिर (१२१९ ई) की स्थापना बि करी छे
मण देव : मण देव न केदारनाथ मार्ग पर नालाचट्टी मा एक मन्दिर (१२४२) बणे छौ
माधवा नन्द को गढवाळ औण
वैष्णव धर्म प्रवर्तक ११५३ का करीब बदरीनाथ मन्दिर आई छया
कैंतुरा जागर अर ये रणभूत जागर का नामी मनिख मनख्याणि
कालू भंडारी : यू म्ल्लूं मा श्रेष्ठ मल थौ अर ध्यान्माला क कारण लड़ाई करणों गे
ध्यान माला ; ध्यान माला राजा धर्म देव कि बेटी छे अर कालू भंडारी क मोरण क बाद सती ह्व़े छे
रूपु गंगसारा : रूप गंगसारा गंगाडी हाट को राजकुमार छौ अर ध्यान माला दगड ब्यौ बान धर्म देव की राजधानी आई.रूपु गंगसारा तैं कालू भंडारी न मारी
लूला गंगोला : लूला गंगोला रूपु गंगसारा को भुला छौ अर वैन धोका मा कालू भंडारी तैं मारी

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
Dr Shiva Nand Nautiyal, garhwal ke Nrity Geet
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (21)
क्रमश : ...भाग - 21
Continued .... part 21
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -21
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 21
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -21

 
उत्तराखंड पर अशोकचल्ल को अधिकार
1170-1209 AD गढवाल अर कुमाऊं पर अशोकचल्ल को अधिकार रै .इन लगद अशोक चल्ल नेपाल को वासिन्दा थौ
क्राचल्ल को उत्तराखंड पर अधिकार
नेपाल विजेता क्राचल्ल न कीर्तिपुर (वैद्यनाथ) का राजौं तैं ध्वस्त करी अर उत्तराखंड पर राज कायम करी. क्राचल्ल न उत्तराखंड पर सामंतों बल पर राज करी .
क्रा चल्ल का साम्न्तुं नौ इन च :
१-बल्लालदेव मांडलिक
२- जय सिंह मांडलिक
३- हरि राज राउत
४- अनिलादित्य राउत
५- चन्द्र देव मांडलिक
६- विनय चन्द्र मांडलिक
७- विद्या चन्द्र मांडलिक
८- याहड देव मांडलिक
९- जीहल देव मांडलिक
१०- मूस देव मांडलिक
अगने ८० गढुं को ब्यौरा

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (22)
क्रमश : ...भाग - 22
Continued .... part 22
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -22
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 22
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -22


गढवाळ मा 52 से बिंडी गढ़ी (1250-1450 AD)
क्राचल्ल या वैक उत्तराधिकार्युं राज खतम हूणओ उपरान्त गढवाळ-कुमाऊं मा जगा जगा छ्व्ट छ्व्ट राजा ह्व़े गेन जौन तैं गढ़पति बुले जांद थौ. असल मा य़ी गढ़पति अपण अपण क्षेत्र का सूबेदार/सामंत/मांडलिक छ्या जु बाद मा सोतांतर ह्व़े गेन.डा शिव प्रसाद न जख ८० का करीब गढ़पत्युं का गढ़ूं नाम बताएं उख डा चौहान न १२६ से बिंडी गढ़ूं नाम देनी .असल मा य़ी गढ़पति अपण अपण क्षेत्र का सूबेदार/सामंत/मांडलिक छ्या जु बाद मा सोतांतर ह्व़े गेन.
गढ़ूं नाम अच्काल का परगना
गढ़ तांग , पैनखंडा खाड, दशौली टकनौर, पैनखंडा, दशौली
बधाण, चांदपुर, चौड़ ,तोप, राणीगढ़, लोहाब, धौना, बनगढ़, कांडा, गुज्डू , साबली, बधाण, चांदपुर, मल्ला सलाण
उल्का, एडासु, देवल, नयाल, कोल्ली, धौना, , बन , कांडा, चौन्दकोट देवलगढ़ बारहस्यूं , चंद्कोट, देवलगढ़ बारहस्यूं , चंद्कोट
माबगढ़, बाग़, अजमेर, श्रीगुरु तल्ला सलाण
मवाकोट, गड़कोट, भैरों गढ़, घुघती गढ़ , ढागु गढ़ , जोर, बिराल्टा, सिल गढ़ , गंगा सलाण, भाबर, नरेन्द्रनगर, देहरादून
बदलपुर, लालढांग, चांडी, सान्तुर, कोला, शेर, नानोर, नाला, बीरभद्र, मोरध्वज,
पत्थर गढ़ , कुजणी, रत्न, कवीला (कुइली) , भरपूर,
जोर, बिराल्टा, सिल गढ़, मुंगरा, सांकरी, बडकोट, डोडराक्वांरा , रामी जौनपुर, रवाईं. महासू, शिमला
नागपुर, कंडारा, नागपुर
उल्का, एडासु, देवल, नयाल, कोल्ली, धौना, , बन , कांडा, चौन्दकोट देवलगढ़ बारहस्यूं , चौदकोट
उप्पू,मौल्या, रैन्का, बागर, भरदार, संगेला पश्चमी पठार, (टिहरी)
यांक अलावा गाथाओं मा
मलुवाकोट, अमुवाकोट, कल्निकोट, रामोलिगढ़, लोहानिगढ़, कत्युर गढ़ , कोककोट, कलावती कोट, नंदनी कोट, धरनी गढ़ , मलसिगढ़, कोतली गढ़, भानी कोट, चांडी कोट, जण गढ़युं को नाम बि आन्दन
सजनसिंह : सजनसिंह नागपुर गढ़ को आख़री गढ़पति थौ
दिल़ेबर सिंह : लोहाब गढ़ को गढ़पति छौ
प्रमोद सिंह : इन बुले जान्द बल प्रमोद सिंह लोहब गढ़ को गढ़पति छौ
देवल : इन बुले जान्द बल देवल न देवल गढ़ की स्थापना करी छे
घिरवाण : इन माने जान्द बल बागर गढ़ मा घिरवाण खशपत्युं राज राई
कफ्फु चौहान : भड़ /बीर कफ्फु चौहान उप्पुगढ़ को गढ़पति राई
भूप सिंह : इन बुले जांद बल भूप सिंह जौनपुर गढ़ को आखरी गढ़ पति थौ

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (23)
क्रमश : ...भाग - 23
Continued .... part 23
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -23
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 23
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -23

 
चाहमान गढ़पतियुं क गाथा ( 13 वीं ईस्वी सदी मा )
जै बगत मोहम्मद घोरी को आक्रमण अर अर दिल्ली मा पृथ्वी राज चौहान अर दिल्ली मा तोमर साम्न्तुं राज छयो वै बगत सैत च गढवाल का भौत सा गढून पर चौह्मान या चौहाण
१- अजमेर का चौहाण गढ़ पति : सलाण अजमेर (अजयमेरु) मा चौहाण गढ़पत्युं राज रायो
२- पयाळ गढ़पति : इन बुले जांद बल पैठारा अजमेर पर पयाळ जाती वालुं राज ह्व़े छौ
३- क्राचाल्ल को बाद भौत सा चौहाण सामंत /मांडलिक न अपणो अपणो गढ़ों पर अधिकार करी छौ
चौहाण की बारा तेरा (12- 13 ) शाखाओं क ब्योरा मिल्द ( रतूड़ी : गढ़वाल का इतिहास) : य़ी चौहाण ज़ात छन
१- झिन्क्वाण
२-तुलसारा
३-मकरोला रावत
४- परसारा रावत
५- धम्मादा बिष्ट
६- अस्वाळ ( या जात घवा डों की सवारी मा प्रवीन छे अर घ्वादों चित्र बि बणादा छ्या इलै अश्वारोही से अस्वाळ ह्व़े )
७- लोभन नेगी / लोहवान नेगी : य़ी साखि मा दिलवर सिंह अर प्रमोद सिंह नामी गढ़पति छ्या . यीं ज़ात की बड़ें गढ़ राजवंश मा भौत च
८- रमोला
९-अजमेर का चाहमान
१०-खैलपुर का चाहमान
११- चांदपुर का चाहमान
१२- उप्पुगढ़ का चाहमान
१३- कंडारा गढ़ का दुमग चौहान
दक्षिण गढ़वाळ का चौहाण १- अजमेर का चौहान
२- रतनगढ़ का धम्मादा चौहाण : कुंजणि मा ब्रह्मपुरी का मथिन रतनगढ़ छौ अर वख एक दें धम्मादा बिष्टउन को राज थौ
३--मायापुर हाट : मा पुंडीरूं राज थौ
४- ज्वालापुर हाट या खैलपुर का चाहमान : इख का छै साख्युं /पीढी का राजाओं नाम इन छया
अ- उर्मी नाग
ब- कुर्मी नाग
स- राय मंगल
ड़- अफती
ई. धामदेव अर वैका छै भाई . इन बोले जांद बल पुंडीरूंन धाम देव अर वैका छै भैयुं तै मारिक कब्जा करी छौ
धामदेव का ७ नौन्यालुं मा से तीन नाम (ओकले अर गैरोला )
१- जीत सिंह
२- भूप सिंह
३-केदार सिंह
४- उत्तम सिंह
उप्पू गढ़ का कफ्फू चौहान : क्फ्फु चौहाण बड़ो भड़ छौ पण पंवार नरेश अजयपाल ण क्फ्फु चौहाण तै हरैकी उप्पू गढ़ पर अधिकार करी थौ
चांदपुर गढ़ का चौहाण
चांदपुर गढ़ युद्ध व्यूह रचना को हिसाब से महत्व पूर्ण गढ़ छयो.
भानु प्रताप : चांदपुर गढ़ी मा सबसे प्रसिद्ध गढ़ पति भानु प्रताप ह्व़े
मंगल सिंह : मंगल सिंग भानुप्रताप को राजकुमार छौ जैन अपण राज भौत फैलाई
हालांकि रतूड़ी को मत कुछ अलग ही छौ
भिलंग गढ़ का चौहान
सोनपाल : सोनपाल भिलंग गढ़ को राजा छौ अर वैक एकी नौनी औलाद छे . नौनी कू ब्यौ पंवार बंश को पैलो रज्जा कंक्पल क दगड कौरिक
पंवार बंश को श्रीगणेश करी थौ
पैन खंडा का बयालीस गढ़ पति
जुमल़ा चौहाण : टिहरी हस्तलेखऔ मुताबिक पैन्ख्नाडा मा हरेक गाँव एक गढ़ (राज) छौ . ए हिस्सा मा ४२ जुमला चौहान गढ़पत्युं राज छौ ( 1270 - 1321 AD)

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (24)
क्रमश : ...भाग - 24
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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -24
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 24
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -24

 
देवपाल राजा अर उत्तराधिकारी (1250 -1280 ई.)
देव पाल अर वैका उत्तराधिकारी (१२५० - १२८० ई) : देवपाल अर वैका उत्तराधिकार्युं न पच्छमी गढ़ देश पर बलवन का करीब राज करी. राज बलबन न देव पाल को राज्य प्र१२५७ ई मा आक्रमण करी छौ .
एकचक्रा को बाहुबाण (चाहुबाण) राजबंश (तकरीबन 1280 -1390 AD )
जण श्रुति, अर अल्लाठनाथ की द्वी संस्कृत पोथी ' निर्णय सूत्र' अर 'सकलपुराण सम्मुचय' को हिसाब से डा. शिव प्रसाद डबराल न बतायी बल पच्छमी गढवाल अर जमुना का पूर्ब (चकराता जिना)
चौहाण (बाहु बाण ) जाती क 1230 - 1420 ई. राज राई अर राजधानी क नाम एकचक्री थौ .
सरूप बाहुबाण (चौहाण ): सरूप एक बीर भड़ थौ अर वैन बाहुबाण राज्य की स्थापना 1230 AD का करीब करी.
कर्ण देव : कर्ण देव राजा सरूप को नौनु थौ अर त्यागी, दानी, भड़ व शिव भक्त छौ
उद्धरण : कर्ण देव कू लौड़ एक बड़ो भड़, गंभीर, धीरू अर सुमति वल़ू राजा थौ, वैकी लड़ाई सीमा पर दिल्ली क रज्जा/सामंत का दगड बि ह्व़े
चन्द्र सेन : उद्धरण कू नौनु बि बड़ो दानि अर शैव्य थौ
सूर्यसेन : चन्द्र सेन कू बड़ो नौनु का नाम सूर्यसेन छौ अर वै ही राजा न अल्लाट नाथ तै 'निर्णय सूत्र ' लिखणो प्रेरणा दे थै .
अल्लाट नाथ सूरी : अल्लाट नाथ सूर्यसेन को राज दरबार मा संकृत को पंडित छौ. अल्लाट नाथ सुरी न 'निर्णय सूत्र' अर सकल पुराण सम्मुचय ' पुस्तक लेखिन.
'निर्णय सूत्र ' एक धर्म शाश्त्र पर नामी किताब छे अर पैथराँ निर्णय सिन्धु, तीर्थ निर्णय , कालनिर्णय , निर्णय दीपक जन किताबुं मा 'निर्णय सूत्र' का उदाहरण दिए गेन
निर्णय सूत्र का पैली भाग मा अल्लाट नाथ सुरी न सूर्यसेन की चार साख्युं (पीढी ) का वर्णन करी
प्रताप सेन : सूर्य सेन कू भुला कुंवर प्रताप सेन अपण बड़ा भैजी क बान लक्ष्मण को जन आज्ञाकारी थौ
देव सेन : देव सेन बि अपण ददा बुबा क तरां बीर अर शिव भक्त थौ
रतन सेन अर उत्तराधिकारी (1390-1420)
रतनसेन अर उत्तराधिकारी : रतन सेन अर वैका उत्तराधिकार्युं समौ १३९०-१४२० का माने जांद अर यूँ राजाओं क राज पच्छमी गढवाल ही थौ .तैमुर लंग न यूँ को राज पर चढ़ाई करी थै .
देवसेन : देवसेन रतनसेन को वंशज थौ
तुगलक उत्तराधिकारी तैं शरण : तुगलकों पर जब मुगलों न आक्रमण करी त देव सेन या रतन सेन न फिरोज तुगलक का बेटा मुम्मद खां तैं शरण दे छे

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (25)
क्रमश : ...भाग - 25
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गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 25
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -25


तुगलक का समौ का पूरबी गढवाळ का रज्जा
तुगलक समौ पर पूरबी गढवा ळ मा तौळ लिख्यां रज्जा छाया :
वत्सराज (बहरूज़ ) , श्रीधर : यूँ का राज 1390 -1440 ई. बताये जांद
जगतपाल रजवार : जगतपाल रजवार को राज समौ तकरीबन 1440 - 1460 ई. माने जांद
जितपाल, आनंद पाल : जितपाल, आनंद पाल को राज कू समौ 1460 -1500 ई. माने जांद
श्रजयपाल : श्रजयपाल को राज को टैम 1500 -1548 ई. माने गे
सत्यनाथ सम्प्रदाय : ये समौ पर गढवाल मा गुरु गोरखनाथ का सत्यनाथ शाखा को प्रभाव ह्व़े गे छौ

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
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पंवार बंश को मूल पुरुष अर राज्य स्थापना वर्ष मा घंघतोळ (भरम)
गढवाळ मा पंवार बंशी राज की स्थापना कब अर कैन कार याँ पर क्वी बि इतिहासकार एकरायी नी च.
इतिहासकारुं मा तौळ क कुछ आधार छन :
भोग दत्त की जनश्रुति ; या जनश्रुति लिखीं च अर सबसे पुराणी जनश्रुति माने जान्द. य़ी जनश्रुति क हिसाब से अहमदाबाद कू बासिन्दा व्यवसाय की खोज मा
भोगदत्त अपण भुला सेज्दत्त क दगड श्रीनगर आये अर चांदपुर रज्जा क इख नौकरी करी फिर वैन चांदपुर राजा की गद्दी छीनी अर राजा बौणि गे .
पैथर वैन हौरी बि गढी जीतें. 900 साल उपरान्त भाग दत्त का 15 वां उत्तराधिकारी अजेयपाल ह्व़े अर तिहातरवीं पीढ़ी मा प्रद्युम्न शाह ह्व़े
भौन पाल की जनश्रुति : भौन पाल की जनश्रुति क हिसाब से भौनपाल धारा नगरी को छौ अर हरिद्वार ऐका खेती करदो छौ. एक जोगी क प्रेरणा से वैन गढवाल का बावन
गढीयों जीतिक पंवार बंशी राज की स्थापना करी
कनक पाल की अनुश्रुति : कनक पाल की अनुश्रुति क हिसाब से गुजरात बिटेन कनकपाल गढ़देश आई छौ , वैकी मृत्यु 699 ई मा ह्व़े सतरवां बंशज अनंतपाल की
राजधानी मलुवाकोट, एकीसवाँ बंशज विक्रम शाह की राजधानी अम्बुवाकोट अर चौबीसवां बंशज सोनपाल की राजधानी भिलंग घाटी मा छे.
सोनपाल न अपणी बेटी क ब्यौ धारा नगरे क राजकुमारकनक पाल को दगड करी अर वै तैं अपणो उत्तराधिकारी बणाय़ी
अगने बाँचो पंवार रज्जों की नामावली

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (27)
क्रमश : ...भाग - 27
Continued .... part 27
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गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 27
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -27

 
गढ़ राज्य राजाओं क नामावली
गढ़ राज्य या गढ़वाल (पंवार बंशी ) का रज्जौं पांच नामावली मिलदी :
१- हार्डविक्क की अंकित गढ़ नरेशों की नामावली : उन त या नामावली सबसे पुराणी च पर भरवस कर्ण लैक नी च. इख्मा प्रद्युम्न शाह तलक 74 रज्जों नाम च
२- मौलाराम की गढ़ नरेश नामावली : मौलाराम श्रीनगर रजा क इख दरबारी कवि अर चित्रकार थौ
३- अल्मोड़ा कू एक पंडित मांगन मिलीं गढ़ नरेश नामावली
४- वेकट की छ्पयीं गढ़ नरेश नामावली
५- विलियम्स की छाप्यीं गढ़ नरेश नामावली
सोमपाल का बूड-खूड (पूर्वज )
मौलाराम की नामवाली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- भौनपाल (भौना ) १- भगवान् पाल
२- अभयपाल २- अभयपाल
३- विशेष पाल
३-कर्ण पाल ४-कर्ण पाल १- कनकपाल १- कनकपाल
४- विशेषण पाल ५- क्षेम पाल २- श्याम पाल २- विशेश्वर पाल
५- सोमपाल ६- व्यक्त पाल ३- सुमति पाल
६-विगतपाल ७- सुरथपाल ३- पांडु पाल ४- पूरण पाल
७- सुरथ पाल ८- जयति पाल ४- अभिगत पाल ५- अभिगत पाल
८- जैत पाल ९- पूर्ण पाल ५- सीगाल पाल ६- भुक्ति पाल
९- पूर्ण पाल १०- अव्यक्त पाल ६-रत्न पाल ७- रेतिपाल
१०-सत पाल ११- शालिवाहन ७- शालिवाहन ८- शालिवाहन
११- अविगत पाल १२- संगती पाल
१३- मंगति पाल
१२- शालिवाहन पाल १४- रतन पाल
१३- संगीत पाल १५- मदनपाल ८- विधिपाल ९- मदनपाल
१४-मंगीत पाल १६-विधिपाल ९- मदन पाल १०- विधि पाल
१५- रतनपाल ११- भगदत्त पाल
१६- मदन पाल
१७- विधि पाल
१८- भग दत्त पाल १७ भग दत्त पाल १० भक्ति पाल १२- बिभोग पाल
१९- चन्द्र पाल १८- जय चन्द्र पाल ११- जय चन्द्र पाल १३- जय चन्द्र
२० कीर्ति पाल १९- कीर्ति पाल १२- पृथ्वी पाल १४- हीरत पाल
२१- मदन सिंह पाल २- मदनपाल १३- मदनपाल १५- मदन सहाय पाल
१४- अगस्त पाल १६- अविगत पाल
१५- सुरति पाल १७- सूरज पाल
१६- जयत सिंह पाल १८- जयत पाल
१७- अनंत पाल
२२- अणिबुद्ध पाल २१- अनिरुद्ध पाल १८- आनंद पाल १९- अनिरुद्ध पाल
२३- विभीगिरी पाल २२- विभोगति पाल १९- विभोग पाल २० - विभोग पाल
२४- विधान पाल २३- सुवधन पाल २०- सुभाजन पाल २१-गुमान पाल
२५-विक्रम पाल २४- विक्रम पाल २१- विक्रम पाल २२- विक्रम पाल
२६- बिर्ज पाल २५- विजय पाल २२ - विचित्र पाल २३- विचित्र पाल
२७- सहज पाल २६- हंस पाल २३ - हंस पाल २४--हंस पाल
२८ सोनपाल २७- सोनपाल २४ सोनपाल २५ सोन (सुवर्ण) पाल
अग्वाडि का खंड मा कान्दिपाल (सोनपाल कू जवें ) का साख्युं (वंशजूं ) बारा मा बाँचो......

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (28)
क्रमश : ...भाग - 28
Continued .... part 28
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti ) <bckukreti@gmail.com>
« Last Edit: December 15, 2011, 12:41:44 PM by Editor Garhwali »

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -28
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 28
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -28


कांदिल पाल अर वैकी साखी (बंशज) याने जगतपाल से पैलाक रज्जा
सोनपाल का क्वी नौनु णि थै अर वैन अपण नौनी क ब्यौ कान्दिलपाल को दगड करी अर राज बि दे
मौलाराम की नामवाली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- कान्धपाल १- कान्ह्पाल १- कांदिलपाल १- कांतीकृपाल
२- सहदेव पाल २- संधि पाल २- काम देव पाल २- कामदेव
३- सुलक्षणपाल ३- सुलक्षण देव ३- सुलक्षणपाल ३-सुलक्षणपाल
४-लक्ष्मणपाल ४- लक्ष्मणपाल ४ लखन देव ४- महालक्ष्मणपाल
५- अलक्षणपाल ५-अलक्षणपाल
६- अनन्तपालदेव ६- अनंत पाल ५-अनंत पाल ५- सतपाल
७- अपूर्वपालदेव ७- अभिपाल ६- पूर्वदेव ६- अपूर्वदेव
८- अभयपालदेव ८- अभयपाल ७- अभयदेव
९-अजेयपाल देव ९- अजयपाल ८- जयरामपाल
१० अजयपाल देव १०- अजेयपाल
११- प्रतापपाल ११- असाप्रतापपाल ९- असलदेव
१२- राजपालदेव १२- जयदेवपाल ७- जय
अगने कू खंड मा जगतपाल की साख्युं (वंशज ) का बारा मा बांचो....


Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी (29)
क्रमश : ...भाग - 29
Continued .... part 29
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« Last Edit: December 15, 2011, 12:43:39 PM by Editor Garhwali »

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गढवाळऐ बड़ा आदिम  (मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -29
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 29
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -29


जगतपाल की साखी (वंशज ) अर टिहरी राज का रज्जा
मौलाराम की नामावली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- देवपाल १- गणितपाल १- जगत पाल १- जितर्ग पाल
२- जितारथपाल २- जितारथपाल २- जितपाल
३-कल्याणपाल ३- कल्याणपाल ३- आनंदपाल २- कल्याणपाल
४- अनंत पाल ४- अनपाल ४- अजयपाल ३- अजयपाल
५- दिपांतपाल ५- दिपाल
६- प्रियनिहार जैपाल ६- प्रियनिहार ५- कल्याण पाल ४- अनन्तपाल
७-सुन्दर पाल ७- सुन्दर पाल ६- सुन्दर पाल ५- सुन्दर पाल
८- सहज पाल ८- सहज पाल ७- हंसदेव पाल ६- सहज पाल
९- विजय राजपाल ९- विजयपाल ८- विजयपाल ७- विजय पाल
९- सहजपाल
१०- बलभद्रशाह १०- बलभद्रशाह १०- बलभद्रशाह ८- बहादुर शाह
११- शीतलशाह ११-शीतलशाह ९-शीतलशाह
१२- मानशाह १२-मानशाह ११-मानशाह १० - मानशाह
१३- श्यामशाह १३- श्यामशाह १२-श्यामशाह- ११-श्यामशाह
१४- दुलारामशाह १४- दुलारामशाह
१५- महीपतिशाह १५-महीपतिशाह १३-महीपतिशाह 12-महीपतिशाह
१६- प्रथिपतिशाह १६- पृथ्वीशाह १४- पृथ्वीशाह १३- प्रथिपतिशाह
१७- मेदनीशाह १७- मेदनीशाह १५-मेदनीशाह १४ -मेदनीशाह
१८- फ़तेहशाह १८- फ़तेहशाह १६-फ़तेहशाह १५- फ़तेहशाह
१९- उपेन्द्रशाह १९- उपेन्द्रशाह १७-उपेन्द्रशाह १६- उपेन्द्रशाह
२०- प्रदीप शाह २०- प्रदीप्तशाह १८-प्रदीप्तशाह १७-प्रदीप्तशाह
२१- ललितशाह २१-ललितशाह १९- ललितशाह १८- ललितशाह
२२- प्रदयुम्नशाह २२-प्रदयुम्नशाह २०- जयकृत शाह १९- प्रदयुम्नशाह
२१- प्रदयुम्नशाह
टिहरी गढ़वाळ का रज्जा
१- सुदर्शन शाह
२- भवानी शाह
३-प्रताप शाह
४- कीर्ति शाह
५- नरेंद्र शाह
५- मानवेन्द्र शाह

Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
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क्रमश : ...भाग - 30
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« Last Edit: December 16, 2011, 09:49:38 PM by Editor Garhwali »

 

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