पहाड़ी फ़ोरम - Pahari Forum

 


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  • Prabandhak: "शेरदा अनपढ़" जी.. कविवर बौड़िक ऐन..  आखिर! आप कविवर, यीं धरती सी दूर, चलिग्यन, कुजाणि कख, कालजयी, कुमाऊनी कविताओं कू, सृजन करिक, अनंत की ओर.....  हमारा प्रिय स्वर्गवासी, जनकवि "गिर्दा" जी तैं, धरती का हाल बतैन, ऊँका चाण वाळौं की, विरह मा व्यथित, मन की बात बतैन, ह्वै सकु त फिर, "गिर्दा" जी का दगड़ा, नयुं शरीर धारण करिक, उत्तराखंड की धरती मा, कविवर बौड़िक ऐन..
    Today at 02:25:47 PM
  • Prabandhak: प्रख्यात कुमाऊंनी कवि शेर सिंह बिष्ट यानि ’शेरदा अनपढ़’ का रविवार सायं निधन हो गया।  कुछ समय से बीमार चल रहे ७९ वर्षीय शेरदा ने अस्पताल में उपचार के दौरान अन्तिम सांस ली।  तीन अक्टूबर १९३३ को अल्मोड़ा के माल गांव में जन्मे शेरदा वर्तमान में हल्द्वानी की श्याम विहार कॉलोनी मुखानी में रह रहे थे।
    Today at 09:46:48 AM
  • Prabandhak: मान्यवर   बुरांस परिवार की तरफ भटेय सादर सैमन्या अर  सेवा  श्रीमान जी  लोकभाषा (गढ़वली - कुमौनी अर जौनसारी )  की समस्या और समाधान थेय " कौथिग २०१२ " मा  मुंबई का प्रवासी उत्तराखंडी  समाज का बीच एक परिचर्चा का रूप मा ल्याणा की कोशिश मुंबई का बुरांस संगठन कु एक प्रयास ,लोकभाषा का क्षेत्र मा पिछला २५ बरसौं भटेय आंदोलनरत धाद संगठन का  " धाद लोकभाषा एकांश "  की विमर्श श्रंखला  "आखिर कनकै  बचऽलि भाषा " मा हम आप्थेय लोक भाषा प्रेमी और बुद्धिजीवी  का रूप मा आपक वैचारिऽक उपस्थिति का वास्ता  सादर न्यूतणा छौं ,   कार्यक्रम मा आपकू आणु और आप्की भागीदारी थेय बुरांस परिवार अप्डू  सौभाग्य सम्झलू  कार्यक्रम मा आप्की जग्वाल रैली  शुभकामनाओं  दगड आपकू अप्डू गीतेश सिंह नेगी जग्वाल मा :  बुरांस परिवार मुंबई ,धाद लोकभाषा एकांश व कौथिग परिवार मुंबई संपर्क सूत्र : ०८७९१५६११०८,०९६१९००४७९७
    April 23, 2012, 12:44:33 PM
  • Editor Garhwali: Mujib Naithani सेमन्या उत्तराखण्ड..बल ..अगर आपको हाई प्रोफाईल ड्रामा सिखना हो तो कांग्रेस से सीखो ..बल ..केंद्र में आते ही सौ दिन का एजेंडा कई दिन मीडिया में चला ..बल अब तो कई सौ दिन बीत गए पर एजेंडा बल पता नि कख हर्ची गे / वनी एक मंत्री दीदा आते ही हवाई फायर हो गए ये तैयार करो ...वो..बड़ी बड़ी बातें ..बल ..लम्बी लम्बी गप्प ..मुझे स्कूल की दैनिक रिपोर्ट चाहिए ..बल इन लगणु च की मंत्री दीदा पहाड़ी नि छन /बल ..किले...
    April 11, 2012, 02:30:16 PM
  • VINOD GARIYA: "कौ लाटा आण काथा, सुण काला तु , अनाड़िल घट लगाई, दौड़ डुना तु"
    December 26, 2011, 04:29:54 PM
  • Admin: नय्या पीढ़ी आपनी पछाण भुल्या धारा नौला आपना पहाड़ भुल्या  गौं में कि भुल्यु चेलो इसके बतुछ बस द्वी आँखा चार हाड भुल्या  भोट मांगन घर घर डेली उनान सब कॉल करार इन गंज्याढ़ भुल्या  "गुमनाम पिथौरागढ़ी "
    December 25, 2011, 09:49:06 AM
  • Rajesh Joshi: कुमाऊँनी रिस्त... माँ - इजा पापा - बौज्यू भाई - भै बहन - बैणि दादा, नाना - बूबू दादी, नानी - आमा चाचा - कग चाची - काखि ताई - ज्यार्ज पड़ोसी - आमा, बूबू, बोजि या पै नानतिन.. बाकि मैंस तो सब प्लेन्स जै रयीं डबल कमूणे लिजी !
    October 05, 2011, 10:09:20 PM
  • Admin: हुक्का . तमाक , पानी बहुते याद ऊछ नानी रात ठुली कहानी बहुते याद ऊछ  रात्ते,छाकला ,ब्याल जतारान में पीसी रूथी हमारी भूख इजा की परानी बहुते याद ऊछ "गुमनाम "
    August 07, 2011, 04:24:33 PM
  • Rajesh Joshi: बेटे की कहानी बाब की जबानी  आजकल का नोनुं न कमरा माँ लगी देवतो की फोटो पता नि कख फेकली उन फोटो की जगह पर KATRINA की फोटो लगेली. चला मेन सोची में भी देखुलू कण हुंदा इंडर का मेडल ...सिरन्दा तला धरया निर्भागी का दुनिया भर का LOVE LETTER. सब तितरा फतिग्या मेरा पेनो क नि रायु सूरार आर वेते चेणु नयोन क LUX और HAMAM. मेडी वेगी MOM , DAD बाबा. मेंन बोली क्या बुनू मी नी बिन्गाणु मेरु लाटा गीत लगनु एक वू I LOVE YOU, I LOVE YOU में समझी ख़राब होगी होलू डबा हुनो बस्युलू घयु copyright Anju Bartwal ;)
    July 26, 2011, 07:42:57 AM
  • Rajesh Joshi: पहाड़ी ग़ज़ल  जब व्हे खोरि कपास व्हे ग्ये बुडा-बदिन की मजाक व्हे ग्ये  ...ज़माना आग लागो तेरी खोरि ले प्यार ,मुहब्बत ले टाइम पास व्हे ग्ये  देव पित्तर पाथरों ले ढाकी हल्या सारि देवभूमि शराब की दास व्हे ग्ये  बैंड में काँटा लगा इसो चल्यो छोलिया संस्कृति को नास व्हे ग्ये  जब ले जान्छ चेलो परदेश इजा का आँखा चोमास व्हे ग्ये  "गुमनाम पिथोरागढ़ी "
    June 22, 2011, 09:07:18 PM

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Author Topic: श्री पाराशर गौड़ जी का गढ़वाली लेख (Parashar Gaur)  (Read 7990 times)  Share 

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या टौपिक का अंतर्गत पाठक श्री पाराशर गौड़ जी का लिख्या गढ़वाली लेख पढ़ सकदन
Under this topic please read the Garhwali articles of shri Parashar Gaur ji (Producer of first Garhwali film "Jagwal")
« Last Edit: January 16, 2012, 01:22:39 PM by Prabandhak »

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मी मु टाइम नी ( मकर संक्रांत )

जनी टेलीफोनी घंटी बजी , मनिखी मरा दादिल फोन उठै की बोली .." हां को च ?" हैकि तरफ बीटी आवाज आई ... " मी छो बुनू, मी ...! " मी कु ---उ ?" सरू छो बुनू सरू ..?? कदुड बीटी रिसिबर हटे की वे थाई देखि व बुन बैठी .." य बोई , कदुड नि सुणी होली .." उची आवाज माँ जोर जोर से बुन बैठी .. सरू छो सरू ......उ..... /// समनी बीटी दादी बोली इतगा जोर लगानै क्या जरूरत च ! कनु बैरी छो मी ! .. हां, बोल.. खूब छई ?

हां खूब छो ! माँ बोली .. लाटी , आज मकर संक्राद च .. मी तेरी बाट छो जग्वाल लू ! तेरी सोंज्यडय भी नि ऐनी एसू का साल ! व बोली .. माँ मिमु टाइम नि ! इन कैर की त्वी ऐजा ! मिन टिकट भेजियाली ! पर बाबा .. ब्य्टुला आदा च छा अपना मैत, इनु रिवाज छो आज तक !सरू बोली .. टैम २ बात च बोये ... बगत बदली गे ! बोलियल ना मिमु टैम नी ! त्वी ऐजा बस !

पराशर गौर
सुबह ९.३० पर २०१०


soruce: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2010_01_01_archive.html

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बड़ा , बडो का, बड़ा काम !

बुल्दन बल कि, कै भी , घर, दफ्तर या सरकार थै चलाण का वास्ता एक समझदार ( याने बड़ो ) आदिमे की जरुरत हुन्द ! अर , उ आदिम अपणा कामो से जणे जांद, पछ्याणे जांद ! वेकु अहोदा , वेकु रूतबा सब वे कुर्सी पर निर्भर करद, जेमा उ बैठ्यु रैनद ! कुर्शी अर काम, द्वी वे आदिम थै क्या नि कराइ दिदिनी , इ त, बादम पत् चलद जब वो वी से उत्तर जाद !

हमरा गौ कु पधान , भजरामल जब तक चुनो नि लड़ी छो, वे थै कवी घास ही गिर्दु छो ! जनि वो चुनो लड़ी अर प्रधान बणी ! सबी वेकी जय जैकार करण बैठा ! अबत रोजा कुकड़ी अर बोतल , कभी तिबरिम , त कभी चौक्म , नचण बैठी ! चाटुकारू कु त पुछे ऩा ! अगर वो ( प्रधानजी ) बोल ..., कि , दिनम रात च , त वो बुलिनी ... " हां .. जी .. हां रात ही च ! अर बाजा बाजा त औरी भी वे थै काचा झयडोम धरी बुल्दा छा "

अजी पधान्जी ...... रात ही नी, बल्कि वो....... अफार , गैणा भी छंन चमकाणा " ! अपणा बीरानो कि पो बाहर ! ये दौरान पधान जी थै , उनका ग्राम उठाना का कार्य क्रममा , न जणी कथगा इनाम मैडल यख तक कि उन को नौ पध्म श्ररी तक चली गे छो ! बी डि यो जिला अधिकारी , बिधायक छेत्रिय, प्रांतीय याख्तक सेंटेरल सर्कार्ल उमठी कै अवार्द्ल नवाजी ! पर जनी पधान जी का द्वी साल पूरा हुवेनी , अर, वो उत्तरा

अपणी कुर्शी से ! कुर्शी गे अब पधान्न जी आया कुर्शी का मूड !

ह्या भै... , जब तक वो पधान छो , कैल भी गिचू नि उभारी ! वो , जू , वेका हर कामम दगडा रैनी ! चाहे , रोड कु ठयेका ह्वेनी ! या , डिगी बाणाणे बात रै हो , ! या बाटोमा खडिनचा बिछाण कि बात रै हो ! या फिर, बिलोक बीटी लोंन दीलाणे कि बात हो ,! बुनो मतलब यो च कि, जब तक भजराम पधान छो ! वेंल अपणा पद कु सदपिओग या दूरपिओग खूब कै ! जू भी बुरु काम कै ! वो सब वैक पूठ मूड !

साब..., जनी पधमचारी गे ! लुखुका गिचा उभना शुरू हवे ! कैल बोली कुछ त , कैल बोली कुछ ! कैल कुछ लाछन लगैनी त , कैल माँ बैनी गाली देनी ! सबसे चोंकावाली बात त , मुरखवाली कि बात से ह्वै ! जैन भारी पंचैत माँ , पधान जी पर चरित्र हनन कि बात कै .. " .. रुद रुद, व बोली , ये पधान्ला, ... अब क्या बोलू .. बिलोको कर्जा माफ़ काना वास्ता मी थै अपणा घोर बुलाई अर .......... ये सुणी सब सन ... ! गौम त

जन , व भुच्यालू एगे छो भुच्य्लू ... ! हमारा इलाका क , गौ गौ , पट्टी पट्टी म एक ही छुई. एक ही बात ..अर अखबारों माँ रोज , वेका बारम्म आये दिन एक नयी खबर ! अखबार फुन्डू फुका , जतका गिचा उत्की बात ! अर जैल जनी मिसी की लगै ! भजराम जी थै जनता माँ मुख दिखाणु मुश्किल ह्वैगी ! बात पटवारी, कानून गु से हुन्द हुन्द सरकार तक भी पहुंची ! सब्युन एक स्वर म बोली " जतका अवार्ड्स ,तक्मा छन ,

सब वापस लिए जावा ! " बिचारा क्या कैरू .. बड़ा कामू नतीजा बड़ो ही हुन्द ! अबतक त भीतरी भीतर च ! अब द्याखा , कख वे का उ काम वे थै कख लिजन्दीन !

पराशर गौर


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नेताओ की पछयाण

नेता बल आम आदमियो से बिलकुल ही अलग हुन्दन अर पछीणे जदिनी ! जन कुतो माँ , खुजली वाल वालू कुता .... दूर बीटी ही पछ्याणे जांद उनी जनता का बीचम वो भी ! ऊकी , चाल- ठाल, उठूणु-बैठूणु, खाणु- पीणु , बुन- बच्याणु , सब , सब से अलग ही हुन्द ! जी हां , अलग ! संस्कृतं एक श्लोक च " लुन्ड़ो ; बिचतरो गती : " अर्थात जन की लुंड माने आवारा किस्म का आदमी की हर कुछ अलग ही हूँ उनी नेताओ की भी !

हमरा यख याने गडवाल बीटी वी नेता हूनी , जोन, द्वी -द्वी ब्यो कैनी ! जनकी हेम्वान्ती नदन बहुगुणा, शीबानद नोटियाल , जग मोहन सिह नेगी आदि आदि ! अबत कुमो बीटी भी य पर्था चली आण लगी ! हरीश रावत भी ये लग्यात माँ शामिल ह्वेगीनी ! या सबसे पहली पछयाण नेता हूँण की ! नेता त, कई ह्वनी ! पर, इन जन ना ! .. बाकी त जन बुलदं ना बल " बड गोर बल लूण बुकाऊ , अर छुटा थुबउड़ चाट " वनी !

ऊ बुल्दा कुछ छन अर करदा कुछ .. ! देख नी आपल, आज से १० साल पैली , एक बडो नेताल..., तब जू बुलद छो , की मेरी त अंतर्राष्ट्रीय राजनीत म दखल च ! त फिर मी प्रदेशीय राज्नितिम किलै जो ! मयारू दिमाग खराब च क्या ? है, ..... मि , कै पागल कुत्तो कटियु छो जू मी इनु काम कैरू ! कुई पागल ही ह्वालू जू प्रांतीय राजनीतंम जालू ! उन यख तक भी बोली दे छो की " राज्य ? कनु राज्य ...! अगर राज्य बनालू भी त मेरी लाश पर ????? ,,,,, अर जब राज्य बणीगे ! सया पिच्ल्या दरवाज बीटी राज्य की सब से अहम कुर्सी याने चीफ मिनिस्टर ह्त्येदी ! य दूसरी पछयाण च !

तैला मिल्या खुवाल, त , हमन सुणी भी , अर देखि भी छ ! पर, हर
चुनोमाँ , फिरका परस्ती , जजमानी -बामणी, खा- बा- डा अर बाजा बाज त गड्वाली कुमुनी नि चुकदी ताबा ! ये भै, कुई यूथे पूछा ....... /// तुम त हैरी जीती चली जैल्या .... पर हमत यख यखी रैण ! म्यारा गौ माँ कुई जाज काज होल त बामणलत काना ! कुई मोरी भाजिगे त हमले त हमने त हूँ ना कठा ? हमनै त, उठान ना ..मुरियु मुर्दा ? की ई आला देहरादून बीटी, हमरा गौ माँ मुर्दा उठानु कु ? जबरी यूथे हमरी चाड रैद त, कन घुम्दी, हमरा अग्वाडी पिछाडी लिडा कुकर सी ! अर जब हम थै युकी जरुरत पुडाद त तब पट दरवाज बद कैकी भैरम संतरी जू बितर त भीतर आगन्म तक नी आणि देदु ! युकू कुई मुवार्लुत वख सरकारी सरय मशीन दोडी डोदी ई जाली ! युका आसू पुच्णु बड़ा बड़ा अफसर मंत्री ऐजाला ! ये किक नि हुन्दन ये एक औरी पछ्यण च ! ईनी कै बता ओउरी भी छन !

पराशर गौर
नम्बर १६ दिनम ११.५५ पर


Source:http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/12/blog-post_6989.html
« Last Edit: April 10, 2010, 03:29:45 PM by Girish »

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बाबाओ की दूकान ;

घुप्या जनि पैदा ह्वै , पैदा हुदै वेल बोई खाई दे ! सब्युन वे थै ट्व्का ट्व्का बुलण शुरू कैदी ! बुबा कारू भी त, क्या कारू ... खैर जनि कानी कैकी वेल वे थै पाल्ली पोसी बडो कई ! जनि वेल आठ पास कारी , बबल हाथ खडा कैदिनी य बोली की की " बिटा, अब म्यारा बसों नि राइ तेरी अग्वादी की पदाई को खर्च उठाणु ! इन कैर की ,तू भी त्खुन्द जैकी कुछ ध्यली पैसी कामो ! "

घुप्या अब, करू भी त क्या कारू ! .. कख जो? क्या कैरो ? नादाँ उम्र , पदाई लिखाई भी ज्यादा नि छ ! वो कपाल पर हात लगे की बैटीयु छो की तबरी एक बाब आई, वेसी पुछन लेगी .. " बेटा यहाँ पर रीखनी देबी नेगी का घर कहा पर है .." बाबा के साथ चार पांच चेले चांटा भी छाया ! वेल इशारा ल उंकू घोर बताई ! वो बोली " जरा चल वहा तक हमारे साथ " ? जनी वो वाख पोचिनी , घुप्या क्या दिखदा की रिखणी
बोडी लंप तंप कैकी वे बाबा का खुटो माँ पुड़ी गे ! जू नेगी जी खुणी खाणु त खाणु ,, चा तक नि बाणों दी छई , व, वे बाबो खुणी दाल भात, सब्जी , बन बनी का पकवान बाणोंण लगी ! बाबा पर खासी को रोग छो ! हर बगत खप खप कनु छो ! नेग्यण वेकु खंक्हरू तक चै उठोंण पर लगी जैन नेगी का कपड़ा तक णी उठाया !

घुप्या घर ग्या वेल अपना बा से बोली " बुबा ण त मिल अगनै पणई आर ना ही नौकरी कने ! " बबल जब य सुणी त, वेसे बुन बैठी " त क्या करिलू ..
चोरी च्पोरी ?
न -- न -- मी बाबा बनुलू बाबा .. !
त जोगी बणिली .. है ? बबल पूछी !

बड़े प्यार से वेल बाबा थे समझीइ ' अचा एक बात बतो .. ज्यादा पैडी लेखी की , ज्याद से ज्याद ३ ४ लाख साल का मिल्ला ना ? आर जू मी एक ही दिनम
इतका कामे दयुल त ...? बबबॆ की सम्झ्मा बात नि आई

घुप्या रात झणी कबरी सटक .. आज पट २० २५ साल हवे गीनी वे थे हर्च्या ! बुबा बिचरू आदा जाड़ों रैद पुचुणु की कहकी तुमल मेरु घुप्या भी देखि
घुप्या दिखया आज बाबा घुप्यानाथ बणी छ माल लुटूणु ! च्याला चान्तो की मोज ही मोज ! अर अफु क्या टाट बाट .. आबत वेल बाय्कैदा बाबा बाण नै की एक इंस्टीटुयुशंन भी खी याल जख हर साल एक ना की बाबा निकल दी !

पराशर गौर
नमम्बर २८ ०९ सुबह १०.२३


source:http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/12/blog-post_02.html
« Last Edit: April 10, 2010, 03:32:18 PM by Girish »

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ब्यौली कु मामा
{कौथीक माँ,यु के का चीफ मिनिस्टर कु उद्घाटन दिवस का समय पर , नि आण पर }
ब्यौली कु मामा

सुन्दरी कु ब्यू क दिन जनी नाजिखू आंदा गिनी , वीका ब्व़े- बबन , गौ भयात, आस पडोस दूर- दराज का नाता रिसतादरु थे न्यूत भिजण शुरू कैदे ! सुन्दरी कु ममा देहरादून माँ छो काम कनु स्यु साब वीथी तक लगे की पीली त फोन से , फिर चिठ्ठी , फिर निमंत्र्ण पत्र भेजी वोद नाद कैकी बोली गई की १९ २० को भाणजी ब्यू च वेल उभरी बोली की .... हा हां ह .. मी पहंचु एक स्फ्ता पैली !

सहरु माँ खाशकर मुम्बे जन सहरुमा हर चीज मैंगी ! खैर , सुन्दरी का बब्ल अपनी औखात क अनुसार हर चीज कोरी ! कै भी चीम कमी नि रेजो वें अपणी समणी , अपणी आंख्यु न करी ! पंडाल . साजो सामान , खाणी- पैनी सब कुछ ! जनी तारीख नाजिखू आई वनी पौणा न्युतेर भी आणा शुरू ह्व़ाय ! एक हफ्ता पेल बीटी उनका घरमा रौनक ही रौनक ...! घर सजी, पंडाल सजी, बेदी सजी , ! बरातों दिन भी आगई ! बरात भी आई ! आवा भगत का बाद बेदी माँ फ्यारा फौरा ह्वेनी ! पंडाजिल बोली ' ------- ये भाई नौनी कु मम्मा थे बुलावा , " सब लगी मामा थे खुज्याँ पर ! ममा देख्या त आई नि ! तभी कैल बोली ' अजी ई त गे छा पर यखना अपणा ससुरास्म " ! वो ... , सरकरी खर्च्मा होलू आयु , तभी कैल बीचम व्यंग माँ बोली ! " हां भाई .. भांजी थे थै कभी मिली जै सकद आर मिली भी जालू पर स्याल सायली हे बाबा .. कनी बात छा कना .. ???

एक बुजर्गल बोली पंडा जी सरासरी मन्त्र पडा ! कख छा लगया ! ब्युली गे, बरात ग़े, न्युते गया पर ममा अभी तक नि आयु !

पराशर गौड़
दिनाक २१ फरबरी २०१० दिन्म


source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2010/02/blog-post_22.html

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जख्या तखी

बुनू , बल हम बडा आदिम ह्वैग्या..... तमीज से , सोच से, अर ध्यली पैसो से भी ! , जब बीटी हम यख, नार्थ अमेरिका ( कनाडा ह्वा या अमेरिका ) अया ! ... सब उत का घसा .. डाल लगली युकी झ्लुडी....., .
बडा आदिम.. ! //////// जसी बल पडया लिखा छी अर सात समन्दर पार भी ऐगीनी पर टाग़ खिचैई ,चुगली जानी आदत अभी तक भी नि गे अर जैल भी कने ..! छा त हम पहाडी ना ?
बड़ी मुश्किल से , नेगी दाद्ल , कोशिश करी की याखा का तमाम पहाडियु थै कठा कराइ जों ! उन सब्यु थै
चिठ्ठी भ्यजिनी ! फोन करी ! एक मायन्म खुदी, ओर्गानैजर बणी ! कलर्क व चपडसी भी ! सिर्फ एका बाना की हम लोग एक जगह कठा हुला अर , .. ह्वैइ भी छन ! हे भै , ... बांज पोड्ली युकी जागा ... शुरुवात अच्छी भली ह्वै पर बीचम तबरी , कैल च्युली माने की कोशिश कई दे .. आदत जू ठैरी !
" मेरी य सम्झ्म यनि आणी च की, एकी जरूरत क्या च ? अर किलै चैद हम थै ? अछा .. , चला माना .. ..., एक आर्गानैजेशन बणीगे ! आप त जण्दे छन की, यख , भी, हम गडवाल अर कुमाऊ सा छा ! ई पंचैत से मयारू सवाल यु च की ... एकु अध्यक्ष कु होलू ????? अर कह बिटी होलू ?
द जा .... कख एकता की बात छै हूणी ! यखत यूँ धडा कराणी की कोशिश शुरू कैदे ! कुछ समझदार लुखुल समझाई बुझाई की बात आई गई कै दी , पर , दिमाग्म त एक पिच त डाली दे वेन गडवाल अर कुमाऊ कु ?
संस्था बणी ! पैली कार्य-क्रम माँ द्वी ऐनी ( गड्वाली/कुमायुनी - अमेरिका अर कनाडा वाल भी ) .. हे भै .. सुआर का बचों का पेट माँ इनु डो की पूछा ना ? हैका कार्य -कर्म माँ पैलत उन अमरीकी -कनडियनि कराइ ! द्वी युका बीचमा डालर थै लेकी खीच ताणी ह्वै .. की तुमारु रुपया की कीमत कम च ये वास्ता हम आप क दगड नि ई सकदा ! द ... करा बल बात ... स्यु साब हवाय अलग अलग ... मित बुनू छौ की केकु आई होला साल यख ?
" ठीक ही बोली कैल... पहाडी भी किसके .. डाल /भात खा के खिसके .." चला हमर दगडी याने कनाडा वालो
दगड त करी करी , पर तख क्या ह्वै ... द्वी धडा ! एक न्यू जर्सी अर हैन्कू वाशिंगटन .. पाह्ड्यु का फड़का !
युतक मै चैन नि आयु .. सिकागो म भी द्वी .. हे भै .. यख उत्का पहाडी नीन जतका संथा बणी गीनी !
जब हमल यु काम , अर, इना काम कनी ही छा त वाखी रैलिदा ! के फैदा ह्वै हमरु यथा पैड़ी लेखी..
रैगया ना कूप मंडुप का मंडूप्मा ! जख्या तखी ......

पराशर गौड़
कनाडा अक्तूबर १८ ०९ सुबह १०.०७ पर


Source:http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/11/blog-post_9617.html

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लगुल छै च त, ठंकुरु घटे ही जालू !

ब्वौजी अभी जवान ही छा, पर , अचाण्चकी वा हम सब थै छोड़ी चलगी , उ भी ..., भरी ज्वानिम ! भैजी परेशान ! बोड़ी हक - चक ! गौ वाल भोंच्या अर मी .. खौल्यु, की, यु, हवा त, क्या हवे ! न रोग न बयाधि ! न मुडरू न डौ ! न हर्पण , न उकाई ! यु बिजोग पोडी त पोडी किलै !
भैजी एक कूणम जम्प्या सी बैठ्या छा चुपचाप ! गौ का लोग एक एक्कै मुख पर छा आण अर अप्ण अपण तरीका से छा बोड़ी अर भैजी थै सांत्वना दीणा ! एक बुजर्गल बोली " बिटा जांवाला दगड कुई नि गे... जू हून छो सी ह्वै गे ! अब अफु थाई संभाल " तभी पधान काकी आई अर बोड़ी से बुन बैठी ................
" दीदी , ... सैद वीकू इतुग्वी तक राइ होलू हमर दगड .. अब हुणि थै क्वी टाल थुडी सकद तबा ...
भैजी तरफ देखी बुन बैठी ... ब्वारी त गे ना ...., ब्यटा त छै च ना ........
" लगुल छै च त, ठंकुरु घटे ही जालू "
मिन बोली .. काकी .. त ब्वारी ठकुरु .. अर भैजी लगुलु व्हा आपक हिसाब से .. है ना ????
वा बोली 'हाँ..." त एकु मतलब यु ह्वै की ब्वौजी याने स्त्री जात मरी अर पुरुष बच्यु रेगी त हैकू ब्यो करै जय सक्द ... व बोली ..... 'हाँ" ..
अर जू दादा नि रैन्दुत , याने ठंकुरु छै च पर लगुलु नि च, या , नि रायु त , क्या ? बौजी हैकू बियो कई सक्द छा क्या ??

उत्तर छो " पत नी " ...

पराशर गौर

source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html

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इन हुन्द विकास ...

ग्यालू कु नौनु इंजीनियर बणी गौ माँ सबी लोग गयलू थै बधाई दीदा दिंदा थक नी न ! एक बुजर्ग न बोली ' ----- नाती , देश का दगडा - दगडी , गौ , अर सबसे पैली अपणो बिकाश जरुरी च रै लाटा ..."
नातिल दादा की बात गेड्म बाधी दे ! नैकरी भी मिली पी डब्लू डी माँ ! जख एक का चार , कभी कभी ६ ८
मशालू मिलै की बिल्डिग खडी ... अर वेंम ऐंची कमाई पुछ ना .....

पैली दिन वैथै कई की जगह भीजै गे.. फाईल देखी त, वेसे पैलिऊ इंजीनियरल एक कुवा की खुधाई की लम्बी चौडी फाइल वो भी, लाखो रुपया कु खर्च चो दिखयु .. हैका इंजिनीयर की फाइल देखी त, विल भी वे ही कुंआ पर अग्वाडी मरमत का बाना लाखो रुपया खर्चा छो दिखयु वेल सोची .. जरा देखी की औ की कख च अर मरमत कख तक पहुँची .. ?

वो गे , त वख कुई कुवा नी छो , अर, फ़ैल ये लम्बी चौडी अर रुपया..., लाखो माँ ! कुछ देर सुचुणु राई की , क्या कैरू ? फाईल बांध कैरू ..की, काम चालु रखु ? दादा की बात याद आई " देश अर गौ का दगड सबसे पैली अपणु विकाश कैरी " वेल एक हैंकी फाईल खोली ... अर लिखी .......
" गौ का हित अर विकाश थै नजरू माँ रखी मिन वो कुआ .. मटी से भर दे ... जैमा २-३ लाख रुपया कु खर्चा आई ! ये काम से गौ वाला भी खुश मी भी अर सरकार भी ..." फाईल बन्ध ! पैसा किसा हुद ! कागजो माँ विकाश ही विकाश !

पराशर गौर
दिनाक २० सितम्बर ०९ समय सुबर ११.१४ पर


Source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html

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बगत बगतै बात !

एक गौम एक लाटु रेंदु छो ! वाखा नाना तिना , बडा बूढा, जनना सब , जैल भी बुलाई लाटु कैकी ही बुलाई ! अर वो बिना हां बोली, उकी एक आवाज पर हैन्सी मुंड खुजलैकी देख रैन्द रा ! समान का नो पर केवल त्रिस्कार का सिवा वेल कुछ देखू ही नी ! जैल भी ,जब भी चाह लाटु बोली दुत्कारु ही च ! सम्मान क्या हुन्द वी थै भीतरी भितार सन पत् छो ! इजत क्या हुन्द वी थै मालुम छो !

एक दिन गौ का मर्द नमान सब खेतो माँ चली गिनी अर जनना घासों ! उ दिनों , पटवारी अर कानन गु को , गौ माँ आणू , अपणा आप माँ एक भारी बात माने जादी छै ! अर उंसे बात कानी त भारी बात ! वे दिन गौं माँ कुवी नि छो! गुरबाटा ( चोंराहे ) माँ वे लाटु कु जाणु ... अर समणी बीटी घ्सेरू कु आणू अर गौ का लुखो भी दिनों खाणु टाइम पर घोर आणू ..... क्या दिख्दी , की , पट्टी कु पटवारी वे लाटु से कुछ चा पुचणु ... जनि जननानो अर मर्द्लू पटवारी अर लाटा थै बात करद क्या देखी , सब एक त डै रै मारी , सबी जख्या तखी छा खडा हुया छा झणी , क्या बात च धो आज पटवारीजी अचाण्चकी अर गौमा खैर, पटवारीजी कुछ देरका बाद चलिग्या ! अब सबी जानना मर्द वे लाटा का अग्वादी पिछाडी लगया रिट्णा ....

एक बोली " ------ रै लटा .. बातो त साईं ,, पटवारी जी क्या छा त्वै पुछ्णा .?."
" वो चुप्प ... "

एक जननं पूछी .. " लाटा बातो त सै, क्या छा पटवारी जी पुछ्णा ? "
"वो फिर भी चुप्प ...!"

कत्कै लूखल जणै की कोशिश कारी , पर , मजाल जू , लाटु कुछ बुनू तयार ......!!!!!

जब पधान जी न पूछी " अरे , लाटा क्या छा पुछ्णा ? "

वो बोली "-------- जै गिचाल पटवारी दगड बात कारी , वी गिच्ल तुम दगड क्या बात कन ." . बोली सीधा सारी जनि चली गे !

पराशर गौड़
दिनाक १३ सितम्बर २००९,रात ०.४५ पर


Source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/09/blog-post_9254.html

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काश पर्दा नि खुल्दु

हमारा इलाक माँ एक गह्ढ़वाली नाटक मंडलील कई नाटक करिनि ! कुछ त धार्मिक छाया त कुछ सामाजिक ! रावत जी वेका डारेक्टर छाया जोंका निर्देशन माँ कई नाटक खेले गिनी ! लुखमा उको बडो मान सन्मान छो ! वो बडा तह दिल से आर बडी लग्न का साथ काम करदा रिंदा छा ! पिछला साल बीटी उमा, अर , सह निर्देशक खुग्साल जी माँ थोड तना तनी छनी छै ! ये समय उन गोड़ जी कु नाटक काना की सोची कारण यु नाटक लीग से हटीक छो .. याने , यु नाटक करण वाला अर खिन वल्लो पर एक कटाक्ष .. कटाक्ष बोले तो .. जबर्दस्त .. रिहर्शल हुन से पैली अर नाटक हुन हुन तक ! यु द्वीयुक बीच कन खिरतु जुड्यु छो , इनुकी जन बुलद द्वी बागियु क बीच खिर्तु जुडुद खिर्तु ...

जनी नाटक शुरू क्या होई उनी युमा भी ..झगडा .. बड़ी मुश्किल से पैलू शीन होई .. बाद माँ रावत जी स्तागेम आनी अर अपनी मज़बूरी बताई की नाटक थोडा बिलम्ब से शरू करला !
पर्दा पैथर स्टेज माँ घ्प्रोल चनु छो ..

रावत जी खुगासाल की तरफ इशारा कैकी छा बुना ..." मी सब ज्ञण्दु कुछ लोग मेरा खिलाफ साजिश छ्न रचणा "

खुगासाल जी छा बुना .. जू आदिम हमपर लाछन लागाणु च वो , पैली अपणा गरेबान माँ छाकी देखा की कोच साजिस कनु ... हे भै , जुमा जुमा चार नाटक क्या खेलिनी की भयम नि नजर .. रावत जी गुस्स्म बोलिनी ..." न .. न्न्न्न , त तू क्या करली "

- मी.. .. मी... क्या करुलू ... तभी कैल बीच बचाऊ कने कोशिश काई ! वो बोली .. ' अजी खुगासाल आप चुप हवे जाओ दी .... तभी रावत बोलिनी......

" हां .. हां क्या करली बता ?

" खुगासाल बोल '-------एक नई संस्था खडी करुलू होरी क्या " तुमरी ई संस्था का अग्वादी न्यू सब्द जोड़ी की .. "न्यू ड्रामा मड्ळी " जेमा सब कुछ न्यु होलू जानकी डारेक्टर , .... तभी पर्दा खुली ! लुखुल द्वी थाई देखि जू एक हैका क कालर पकडी छा झंझोड़ना !

पराशर गौड़
सितम्बर १०, २००९ स्याम ५.०५


Source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/09/blog-post_10.html

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गड्वाली ( चंदरर्सिंह ) की हन्त्या

देहरादून का राजनीतक गलियारों माँ आच्कालू जख देखा , जेमा सुणा एक बात ! अरे भाई , हमरा याखा बिधायक / मंत्र्री / संतर्री सबका सबी भतरी भीतर छन कम्प्णा आर नच्णा ! अलग अलग पार्टियु का सचेतक
अपणा अपणा अनुसार जनता माँ अपणी अपणी पुकार ले की गिनी की यु क्या हुनु च ! पर कुछ पता नि चलू !

उकी सम्झ्मा इनी आई की आज ९ साल ९ मैना से उपार हुण्वाला छन पर , हम पर ..., या रोल बोल कैकी अर कैकी च ! हमारी, हमरी ना ! -- हमरी बिरोधी पार्टी की भी ई शिकैत च की , यु क्या हूँनु च !

चंदरसिंह गड्वाली जी पैल त भारत का वास्ता लडी ! काला पाणी ताके सजा भी हुई ! फिर ता उम्र उत्तराखंड बाना ... मुर्द मुर्द तक गैरी सैन राजधानी की रटना रट्द रट्द बिचारा ई दुन्या से चलीगी ! सरया लडाई उकी , वो बिना खंया पीया चली गी अर, राज्य मिली त खाणु कुवी ओरी .... अब..., आपीबोला , उकी हन्त्य ल नि आणु छो त , कैकी हन्त्यल आनु छो ?

राज्य की लडाई उत्तराखंड का तहत लडैगे अर जनि मिली नै बदली दे ! .. हे भै .. , वेकी आत्माल दुखी नि हूँ छो .. उत्तराखंड से उत्तरंचल .. वा साब वा ... ! बुठ्याल, देखो अपनों छल .. पहलु मुख्या मंत्री पहाड़ से ना बल्कि बिदेशी .. जों पहाडीयु की टक लगी राइ होली वी कुर्शी पर वा त गई ना उका हाथ से ! वेल भी अपना राज भी पुरो नि कई सकी अध् मई चली गे ! फिर आई हाथे सरकार .. जू बुल्दा छाई की मेरी लाश पर बण्लु
यु राज्या वी मुख्या मंत्र्री .//// . गढ़वाली जी की खाठमाँ आगी भपकरा जी भपकरा ... इनो छल कैरी की नो छम्मी नारैण की बुध हरी दे .. वे थाई इनु जापी की वेल अपना अपना लुखो थै इतका लाल बाती बाटीनी की जों थै देखि देखि जनता का आंखा लाल हुवे गीनी ! उ भी गे ! फिर आईनी कमल .. अपणो आदिम समझी सब्युन वेकी भूखी पै ! आँखियु माँ बिठाई . " ए भै , जै बो को बल बडू भारवासू छो .. वी , दादा बुन बैठी गे "

सियु नाची बुठ्या फिर ... २ साल का अंदर ही अन्दर वो भी गे .... अब देखा ई न्यु कब टिकत ! अगर जू राजधानी कु मामलू सभाली देलू यु , त , हुए सकड़ रै भी जा ! निथर ... जांदा मै समझा !

जब तक गढ़वालिजी की आत्मा थै शान्ति नि मिलाली त भरै ... इनी समझा ......

पराशर गौड़ २७ अगुस्त ०९ समय ४.३० बजे दिन में !


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ससुराल मेरे पार्लियामेन्ट !

बगत बगत चुनाओम हैरी , मेरी घरवाली मी से तंग ऐगी ! जनि पार्लियामेंट का चुनाव की घोषणा होई , त , मेरा पेटा जुनका फिर खडा हूँ बैठा ! मेरी पत्निल जनी देखि की , कि , मी हरकत म आन बैठी गेउ . वा बोली ...

" वी निर्भगी पार्लियामेंटो कु मोह अभी तक नि गे है ..., मेरी ख्याल से मुरूद मुरूद थाई की जालू स्यु किडू ... "

मिन भी सोची , काश..., मुरूद मुरूद सिर्फ एक दाऊ .. एक दौ वख पहुँच सकदु त , मी सम्झुदु की मी बैतरणी पार होईग्यु , पर हे राम .. कख छो बल जोगी हुना भाग !

स्यु साब ..., वख त की जायालू पर , हम भी पका छा पका ... ३६ ना सै ,कम से कम १५ २० नेता जी का गुण त छाई छी हम पर ! आखिर हम भी , नेता ह्या ना नेता ! हम थै , यु ख़याल आई , अर सोची ..., कि पार्लियामेंट ना .. त .. ना सै , अब अर आज बिटि हमरी पार्लियामेंट हमरी ससुराल होली .. जख हम अपणा मन कि हीक निकाल सकदा !` सासुराल रूपी ई संसद माँ वो सब कुछ च, जू वी, संसद म च .... . मान सन्मान ,रॉब रुतबा , आवा भगत एक आलवा बनी बनी का बिभाग छन ! कुल मिली की ये सब हमरा रहमो कर्मो पर टिक्या छन ! हमरा इशारों पर जिंदा छन ! बन बनी का बिभाग छन !` कुलमिलैकी ई सब हमरा नाज-नखरो पर जिदा छी ! हम ई संसद का नीर बिरोध अध्यक्ष/ प्रधान मंत्री जो बोलो उ छा ! मजाल कुवी ना नुकर या टी टा कै दया ! हमरी आवा भगतं २४ घंटा सब एक खुटा पर खडा रंदी ! जन संसद म ७५० एम् पी अपणा पार्टी का मुख्या प्रधान मंत्री का अग्वादी पिछाडी रंडी रिट्णा बस उनी मेरा ससुराल का हर एक प्राणी चाहिए वो सास -ससुर , स्याला - सयाली ,अर गौं का रिश्तेदार हो सबी रैन्द म्यारा अग्वादी पिछाडी रिट्णा ! न हवा कखी जवाई जी की अवा भागतं कमी रैजा , अर वो , नाराज होई जावन ! हमल भी नाड पकडी च ! ससुराल वालो से सुधी सुधी मालकी जाणु , ख्माखा नाराज हवाई जाणु ताकि ईयू पर प्रभाऊ बणियु रा !

ससुराल की ई पार्लियामेंट माँ , उन त कई महत्वा पूर्ण बिभाग छन , पर , रक्षा अर बित बिभाग का इंचार्ज ससुरा जी छन ! साल भरै या पञ्च बर्षीय जानी योजना का अलावा बीच बीचम राहत जन कार्यो पर खर्चो का वास्ता धन भी यु से ही मिल्द ! एक अलावा रोज मरा की खर्चे की सूची यूके अग्वादी पडी रैन्द ! मजाल च जू यूँ कभी असमर्थता प्रकट कै होली उलटा ये बडी सूझ बुझ का दगड हर झटको थै झेली भी मुस्कराणा रंदिनी जन हवाई जहाज की एयर होस्टेज तरह चाहिए बुखार हो या पेट दर्द पर यात्री का अग्वादी बस चेहरे पर हसी हूँ चैद उनी बिचारा मेरा ससुरा जी भी रंदीन ! उकु ये अदम्य साहस सूझ बुझ थै देखी मी बहुत ही प्रभावित हुई गियु !

अब देखा ना , जब भी मिन अपनी पत्नी से थोडा शिकैत कारी नि , की वा बात , एक डम ससुरा जी का पास पहुँची जांद मर्द का बच्चा अपनी गैणी तकीद गिरबी रखी भी मेरी फरमाइश पूरा कर दी जन की मुख्या मंत्री व वेका चमचा करोंदीन वेका जन्म दिन पर पिस एकटा ! मयारू बुनो मतलब च बाना बस बाना कैकी, कै भी तरह से अपणी इछा थै पूरी काना रंदीन ! खुशी ई बात की च की मिन कभी उनका मुख पर उदासी की कुई लकीर देखी हो ! ख्वाला गिच्ल सदान हैस्णै लगया रदीन ! वो ई पार्लियमिन्ट का सबसे मजबूत, अडिग सख्त खम्बा छन ! पत नी मेरी ई बार बार की मांगो से वो हिला भी छी य ना यु मी थै पत नी !

दुसरा महत्वा पूर्ण बिभाग मेरी सासू जी का पास छन जनकी होम बाणिज्य सुचना ,रख रखाव , आदि आदि ! कै थै क्या दीण ? कैसे क्या लीण ? कखम क्या कन, क्या बुन याने पुरी पुरी दखल च युकी ! अपणी प्यारी बेटी याने हमरी धर्मपत्नी पर युकी ज्यादै कृपा रैन्द याने मोह बोला मोह.. बस मीथै जनी पत लगी या उकी कमजोरी च मिन वेकु पुरु पुरु फैदा उठाणु शुरू कैदी ! संसद माँ प्रश्न का दौओरान बिना रोक टोका जन एक एम् पी अपणा इलाका बारमा बताद की उख यु च इथा पैस्सा चिंदन ताकि वो लोग दो जून की रुवाटी खै सकला.. उनी मी भी अपणी श्रीमती थै अग्वादी कैकी अपणी डिमांड की एक लम्बी चौडी चठी ससस जी की समणी रख देदु अगर बात नि बण्दि दिखेद त श्रीमती थै झट अग्वादी कैकी अपणी फरमायश थै पुरी करवा देदु ! ये खुला अधिवेशन माँ सासू जी की जुबान अर मेरी फर्माशो की ताल मेल दिखन लेक रैन्द ! मेरा दोरों की रूप रेखा अर आवश्कताओं की लम्बी सूची सासू जी का दिल्लो दिमाग म २४ घंटा फिट बैठी रंदन ! मजाल की कोई युकी बात काट दया ! जवाई आया छन त ये बैर क्या दीण ! कलेउ या लठु या दूण कंडी या बक्र्री, कलोड ये सब निर्णय स्सासु जी का ऊपर निर्भर रैन्द ! चोरी छिपी मिसे कोइ औरी डिमांड पूच्णी, ये हमरी गुप्त बिभाग की एक बडी खशियत च ! उन देखी जा त , मी कभी कभी अपणी अंडर टबेल वल्ली दिमान्डो थै , यूँकै माध्यम से पूरा करदू !

प्लानिग कमिशन की चाबी दद्या स्सासु जी के हाथ में है वो मेरे और अपणी नातनी की कोइ भी इछा पर बेझिझक अपणी मोहर लगान माँ कैकी इजाजत नि जरुरी समझादन ना ससुरा जी की और नहीं स्सासु जी की ! स्याल और सयलु थै चता मुता बिभाग छन दिया अआवा भगत का मंत्रयालया युमा छन !

मेरी य पार्लियामेंट जब बिटि शुरू होए , ई माँ चुनौ कु त कुई प्र्बिधान नि ! ई संसदम्, आज तक न त, कुई लडाई - झगडा होए , ना कुई जुत पत्रम्, ना कुई हो- हला ! द्वी बिभाग मिल जान बुझी अपणी श्रीमती थै दिया ना १- रुनु २ -..गंग्जाणु , ताकि वो अपणा माँ बापू पर एकु असर ड़ाल साक ! ये दुवी बिभाग बहुत छन ई पार्लियामेंट थै हिलाना वास्ता !

पराशर गौड़
स्याम ७.५० पर ९ अगस्त ०९


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धात या धाद

कैए गौं माँ , गोरु ( एम् पी / एम् एल एय ) उज्याड़ चली गी ! जनी चोकीदारल ( जनता) देखिनी वेल गौं का पंचैत चोक बिटि आवाज लगाई -----------------
" अरे .. गौ करो ...., टक लगे सुणिल्या .. जै जै मोउ का वो गोर छन वो जैकी अभी निकाली ल्या ! अफार
लालंगी गौडी ( बीजेपी ) आर वो अफार सफ़ेद सांड ( कांग्रेस ) बाकी छुटा बड़ा गोर ( निर्दाली ) अभी अभी बदु मुश्किल ल त जंजाल ( यु पी ) से अलग कैकी बड़ी मेहनत से यु नयु ( उत्तराखंड ) पुन्गूडू बणेए ! जेमा कतकै बेटी बवारियु का हाथ लाल अर बदन लोईखाल ह्यवैन ! कतका लुखुका ब्र्मन्ड कचैनी ! कतको मवासी ख़म लगीनि ! अर जनि ज़रा चल्दु ह्वई कण घुसीनी खाणु ! "

रे गौ वालो ...., यु पर नजर रखा ! न हवा यु थै, इनी गीज पोडी जाली त , यु खेत/पुन्गडा ( उत्तराखंड ) चोपट समझा ! मित बुनू छो ...., इन उज्यड्खा गोरु थाई त पट, सद्न्या को गौं से भैर करा भैर ! या फिर यु पर नजर रखा रै.. नजर !

पराशर गौड़ २६ अगस्त ३.५० बजे सुबह


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उतराखंड

दीनदयाल जी उत्तराखंड का बना कुछ भी कनु तैयार रैंदा रैनी ! त जिन्दगी उंकी उत्तराखंड उत्तराखंड रट्द रट्द बीती ! कुई जलसा , कुई जलूस नि छोडू ! कई दिन भूक हड़ताल माँ बैठिनी ! उंकी एक ही तमना रा की, कैभी कीमत पर उत्तराखंड मिली जा , दगडा दगडी एक औरी भी तमना छा की जब उत्तराखंड मिली जालू त उ एक बुवारी गडवाल बिटि त हैंकी कुमो बिटि कारला ताकि घर में ही एक उत्तराखंड दिखये देलू !

उत्तराखंड मिलत सै पर इनी ना ! दीनदयाल जी तीन नौना में से सबसे छोटू की लाश पर ! दुव्वी नौना कु उन ब्यु करी जन उन सोची छा ! पैली पैली त , दीदी भूली आपस माँ खूब रैनी , भैली उकी बात एक दुसर निसमझदी छै ! कभी कभी सानियुन आपस माँ बात करी खुश ! बाद बाद माँ एक हैंकी सासू जी सी शिकैत करदी रैनी , की , मेरी बात या नि बिगदी आर ना वीकी मी ! हम थाई अनग द्यावा बस ! हम नि राइ सकदा ये किच किचमा !

सससुरल समझाई --" बाबा तुम द्वी मीली जुली रावा ! क्युओ छा एक ही भित्रा द्वी काना ..... अर भी भाषा बोली लेकी .." मेरो सपना छो की मई अपणो घर थाई ही उत्तराखंड बणाई की , एक मिशाल कयाम करुलू पर यख त आज बोली भाषा लेकी अलंग बन्ट्वारु मांगना ना छा त भोल पहनावा से मंगल्या ! परस्यु कुछ पर ..

द्वीयुंन बोली ...." जी हम थै उउत्तराखंड से क्या लीण , हम थै आप , बस, द्वी खंड दे द्युआ ! थै मैल्य खंड अर वी थै तैलया खंड ! आपे बात भी रैजाली अर हमारू काम भी हुवै जालू !

पराशर गौड़ २५ अगस्त रात ११ ४१ पर


source: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/2009/08/blog-post_769.html
« Last Edit: February 05, 2011, 05:08:11 PM by Rajesh Joshi »

 

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